अमेरिका भेजने के लिए दिल्ली की अंजलि को दो लाख रुपए जुटाने के लिए लेनी पड़ी कई लोगों से मदद

दिल्ली की सड़कों पर अपने हाल पर मरने के लिए छोड़ दिए गए कुत्ते के तीन बच्चों की एक ऐसी अनूठी कहानी है जो यह साबित करती है कि मानवता अब भी जीवित है। इस कहानी को दि बेटर इंडिया वेबसाइट ने पोस्ट किया है।

दिल्ली में अंजली लंबे समय से सड़कों पर रहने वाले कुत्तों को खाना खिलाने का काम कर रही हैं। अप्रैल की एक शाम को उन्हें दिल्ली के आस्था कुंज स्थित बगीचे में पांच पप्पी मिले। हल्की सी सीटी बजाने पर यह बच्चे अंजली की ओर चले आए लेकिन उन्हें इन बच्चों की मां कहीं भी दिखाई नहीं दी। अन्य कुत्तों के साथ ही अंजलि ने इन्हें भी खिलाना शुरू कर दिया। वे अभी इनके बारे में कुछ तय कर पाती इसके पहले ही दो पप्पी मर गए। शेष बचे तीन भी बुरी तरह से बीमार हो गए। वे उन्हें शेल्टर होम और वहां से डॉक्टर के पास ले गईं। ब्लड टेस्ट के बाद पता चला कि वे पर्वोवायरस से प्रभावित हैं। इस संक्रामक बीमारी में जानवर को उल्टी दस्त की शिकायत हो जाती है और मुंह से खून भी निकलने लगता है। तीनों बच्चों को पांच-पांच दिन तक कैंग्लोब पी सीरम के इंजेक्शन लगना थे। इस इलाज की कुल लागत ₹40000 थी लेकिन अंजलि के पास इतना समय नहीं था कि वह इसके लिए चंदे की व्यवस्था करती तो उन्होंने यह पैसे स्वयं चुकाये।

बच्चे ठीक हो गए लेकिन एक नई समस्या सामने आ खड़ी हुई कि अब उन्हें कहां छोड़ा जाए। बड़ी समस्या इन बच्चों में सबसे कमजोर पिल्ले की थी। सफेद रंग का यह पिल्ला आसानी से किसी अन्य संक्रमण का शिकार हो सकता था। उसके बड़े-बड़े खड़े हुए कान को देखते हुए अंजलि ने उसका नाम पिग्गू रखा था। इस बच्चे के कान सूअर के कान की तरह लगते थे। इन बच्चों को पैड शेल्टर होम में रखा गया।  अंजलि ने कोशिश की कि लोग इन्हें अडॉप्ट कर लें लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली। 

अंजली पहले से ही रेस्क्यू विदाउट बॉर्डर्स नाम के एक संगठन के संपर्क में थी जो कि अमेरिका के न्यूजर्सी में भारतीय मूल के शिल्पा गड्ढे चलाती हैं। शिल्पा के प्रयासों से बहुत से भारतीय सड़कों पर रहने वाले श्वान अमेरिका में अडॉप्ट किए गए हैं। शिल्पा ने इन कुत्तों के लिए अमेरिका में एडॉप्शन की व्यवस्था की लेकिन अब एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई कि इन्हें वहां कैसे भेजा जाए क्योंकि इसका खर्च लगभग दो लाख रुपए था। अंजलि ने क्राउड फंडिंग के जरिए इसकी व्यवस्था की और अब 13 जुलाई को पिग्गू ट्रांस अटलांटिक फ्लाइट के जरिए अमेरिका जा चुका है। 23 अगस्त को उसके दो भाई बहन अमेरिका की फ्लाइट पकड़ेंगे। इस तरह से दिल्ली की सड़कों से अमेरिका पंहुच जाएंगे। अंजली दिल्ली में ईच वन फीड वन नामक मूवमेंट भी चलाती है इसमें लोगों को जोड़कर यह प्रयास किया जाता है कि वह एक सड़क के स्वान को भोजन कराने की जिम्मेदारी ले लें। 

One thought on “दिल्ली की सड़कों पर घूमने वाले स्ट्रे डॉग पिग्गू को अमेरिका में मिला घर”

  1. good to know that humanity is still alive and a lesson for the people who always look for breeds. love the dog not the breed.

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