Sun. Aug 18th, 2019

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जोमैटो प्रकरण में मीडिया फिर हुआ नंगा

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सोशल मीडिया पर लोग जोमैटो को टोल कर रहे और अखबार लिख रहा है शिकायतकर्ता हुआ ट्रोल

इसी तरह का मनमाफिक कंटेंट परोस रहे हैं मीडिया हाउस

नई दिल्ली. जोमैटो प्रकरण मीडिया हाउस की मनमानी को भी बेनकाब करता है। ये यह बताता है कि अखबार अपने विज्ञापनदाता के किसी भी कुकर्म का बचाव करने के लिए तथ्यों तोड़ मरोड़ कर पेश कर सकते हैं। जोमैटो प्रकरण की रिपोर्टिंग में दैनिक भास्कर की मूर्खता का कोई मुकाबला नहीं है। अखबार ने लिखा है कि खाना ऑर्डर करने वाला युवक भेदभाव करने पर जमकर हुआ ट्रोल जबकि मामले की हकीकत यह है कि ट्विटर पर  #IStandWithAmit और #boycottzomato ट्रोल कर रहा है। इतना ही नहीं #Zomato और #IDontStandWithAmit जैसे हैशटैग पर भी ट्वीट और कमेंट जोमैटो और उसके मालिक दीपिंदर गोयल के खिलाफ ही हैं।

इसके बावजूद दैनिक भास्कर फ्रंट पेज पर जोमैटो की मार्केटिंग कर रहा है और यह झूठ परोस रहा है कि इस मुद्दे पर युवक को ट्रोल किया गया है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर उबर को लेकर भी एक मामला चल रहा है जिसमें कि कहा गया है कि एक मुस्लिम व्यक्ति ने केवल इस आधार पर कैब में बैठने से मना कर दिया कि उस पर हनुमान जी का बड़ा सा स्टिकर लगा है। लेकिन मीडिया से यह मामला गायब है।

 निश्चित रूप से जोमैटो अखबारों, टीवी और यूट्यूब शहीद डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी बहुत बड़ा विज्ञापनदाता है। इसी के चलते आप पाएंगे कि न केवल दैनिक भास्कर बल्कि अन्य सभी प्रोफेशनल मीडिया भी इस मामले में जोमैटो का समर्थन कर रहे हैं जबकि जनता अमित शुक्ला के साथ है। ट्विटर पर क्या ट्रोल कर रहा है यह जानने के लिए कोई बहुत बड़ी तकनीकी दक्षता की आवश्यकता नहीं होती है। इसके लिए आप ट्विटर पर जाएं और मोबाइल स्क्रीन के बॉटम में बने सर्च आईकॉन को एक बार क्लिक करेंगे तो उस समय टि्वटर पर चल रहे सारे ट्रेंड्स सामने आ जाएंगे। गुरुवार सुबह के ट्रेंड्स चित्र में दिखाए गए हैं। इससे स्पष्ट पता चलता है कि जनमत किसके पक्ष में है। लेकिन दैनिक भास्कर जैसे समाचार पत्र की वफादारी विज्ञापनदाता से ज्यादा है बजाय सच सामने लाने के! 

अखबार ने पूर्व निर्वाचन आयुक्त एस वाय कुरेशी के ट्वीट को बॉक्स में छपते हुए कहा है कि कुरैशी ने जोमैटो का समर्थन किया है। यह छापते हुए अखबार शायद हामिद अंसारी को भूल गया जिन्हें की देश में कैसी पार्टी की सरकार आ जाने के बाद जिसके बारे में उनकी मान्यता यह थी कि वह हिंदूवादी पार्टी है उन्हें देश सुरक्षित लगने लगा था और वह मुसलमान को डरा हुआ बता रहे थे!इस तरह से कुरैशी का जोमेटो को समर्थन कोई बड़ी बात नहीं है। सिद्ंधांत रुप में मीडिया और कुरेशी सही हो सकते हैं लेकिन वे इसे जनमत आवाज नहीं बता सकते क्योंकि जनमत की आवाज अमित के पक्ष में है न कि जोमेटो और उसके करोड़पति मालिक के।

इसी तरह का एक और मामला सामने आया है। बताया जा रहे है कि उबर से कैब बुक करने वाले एक मुस्लिम व्यक्ति ने केवल इस लिए कैब में बैठने से मना कर दिया क्योंकि गाड़ी के पीछे के कांच पर हनुमान जी का बड़ा सा स्टिकर लगा था। इसकी चर्चा भी सोशल मीडिया पर हो रही है।


Boycott Professional Media

यही कारण है कि इंडिया मीडिया मूवमेंट जैसे संस्थानों ने प्रोफेशनल मीडिया के खिलाफ सिटीजन जर्नलिज्म का झंडा बुलंद किया हुआ है। यह मूवमेंट ना केवल जनता को पत्रकारिता के आधारभूत गुर सिखाने के लिए शुरू किया गया था बल्कि मीडिया लिटरेसी को बढ़ाने के लिए भी काम में लगा हुआ है। इसके संस्थापक सुचेंद्र मिश्रा ने बताया प्रोफेशनल मीडिया कितना बिका हुआ है इसका अंदाजा आपको उस समय लगेगा जब आप अपनी कोई शिकायत किसी ऐसे व्यक्ति या संस्थान के खिलाफ इन अखबारों में लेकर जाएंगे जो इनका बड़ा विज्ञापनदाता होगा। मिश्रा ने कहा कि अखबार और मीडिया संस्थान खबर के प्रारूप में इन विज्ञापन दाताओं की जमकर मार्केटिंग करते हैं जबकि सच्चाई यह है कि इन मीडिया संस्थानों को यह विज्ञापन केवल इसलिए मिलते हैं क्योंकि पाठक उन्हें पढ़ते या देखते हैं। लेकिन इनकी प्राथमिकता में पाठक और दर्शक सबसे आखरी में आता है और विज्ञापनदाता सबसे पहले। इसी के चलते इस देश में मीडिया लिटरेसी की आवश्यकता है ताकि आमजन मीडिया को पढ़ते और देखते समय यह समझ सकें कि कौन सी खबर किस उद्देश्य से लिखी गई है। 

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