50 वर्षों से लगातार हो रहा है प्रकाशित

मैसूर

स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संस्कृत में देश को शुभकामना संदेश देना बहुत सुखद था लेकिन इसी के दूसरे दिन मैसूर से समाचार मिला की संस्कृत का एकमात्र दैनिक समाचार पत्र सुधर्मा संकट में है और इस पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। सुधर्मा ब्रॉड शीट पर छपने वाला 2 पृष्ठों का संस्कृत का अखबार है।

वर्तमान में इसकी लगभग साढे तीन हजार प्रतियां प्रकाशित होती हैं। लेकिन विज्ञापनों के नाम मिलने और पाठकों के ना बढ़ने के चलते सुधर्म के सामने धर्मसंकट खड़ा है। सुधर्मा के पाठक अमेरिका और जापान में भी हैं इसके लिए सुधर्म $50 वार्षिक का शुल्क लेता है।

सुधर्मा की स्थापना 1970 में संस्कृत के विद्वान के.एन. वरदराजा अयंगर  ने संस्कृत भाषा के प्रचार प्रसार के उद्देश्य से की थी। अयंगर संस्कृत की पुस्तकों के प्रकाशक थे और जब उन्होंने इस विचार को अपने मित्रों के समक्ष रखा तो ज्यादातर की राय यह थी कि संस्कृत का दैनिक समाचार पत्र चलाने का विचार कार्यान्वित किए जाने योग्य नहीं है। लेकिन आयंगर के कुछ मित्र उनका साथ देने के लिए तैयार हो गए। जिनमें से एक थे कन्नड़ समाचार पत्र के संपादक अगरम रंगैया। उनके अलावा सूचना विभाग के संयुक्त संचालक पी नागचर ने अयंगर जी का साथ दिया।

इस तरह से सुधर्मा का पहला अंक 14 जुलाई 1970 को प्रकाशित हुआ। उस समय इसका कार्यालय महाराजा संस्कृत कॉलेज में था। तब से लेकर सुधर्मा का प्रकाशन अब तक लगातार चल रहा है। वर्धराजन अयंगर के प्रयासों से ही दूरदर्शन पर संस्कृत समाचार का प्रसारण शुरू हुआ था। उन्होंने इस संबंध में तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री इंद्र कुमार गुजराल को राजी किया था।

1990 में वरदराजन अयंगर की मृत्यु हो गई उसके बाद से इस समाचार पत्र को उनकी पत्नी और बेटे चला रहे हैं। उनके बेटे संपत कुमार जो कि इस समाचार पत्र के वर्तमान संपादक हैं, वह आर्थिक परेशानियों के बावजूद इसका प्रकाशन जारी रखना चाहते हैं। अभी इस समाचार पत्र की साढे तीन हजार प्रतियां प्रकाशित हो रही हैं। भारत में इसका वार्षिक सब्सक्रिप्शन शुल्क ₹500 है।

15 जुलाई 2011 को मैसूर में सुधर्मा के 42 वर्ष पूरे होने का आयोजन किया गया था। यह आयोजन इस मामले में विशेष था कि समारोह में सभी वक्ताओं ने संस्कृत में ही भाषण दिया था। आप भी कर सकते हैं सुधर्म की मददसुधर्म का ई पेपर इंटरनेट पर मौजूद है। इसका वेब ऐड्रेस
http://epaper.sudharmasanskritdaily.in/ है। विजिटर कम होने के चलते इस वेबसाइट पर विज्ञापन की जगह खाली है। यदि आप इस समाचार पत्र की मदद करना चाहते हैं तो इसकी वेबसाइट पर मौजूद पते पर कर सकते हैं लेकिन इसके अलावा आप इसकी मदद एक और तरीके से भी कर सकते हैं।

Goonj का आपसे आग्रह है कि आप प्रतिदिन इस लिंक को क्लिक कर ई पेपर पढ़ना शुरू कीजिए। जैसे ही सुधर्मा  की वेबसाइट पर हिट्स की संख्या बढ़ेगी इस वेबसाइट को विज्ञापन मिलने लगेंगे। जिससे कि सुधर्मा की आय में भी बढ़ोतरी होगी। आखिर विश्व के इकलौते संस्कृत दैनिक समाचार पत्र के लिए इतना करने का सुधर्म तो करना ही चाहिए। 

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