पचास रुपए में एक कॉफी पीने वाले एक बेजुबान को चार बिस्किट नहीं खिला सके

नोएडा

नोएडा के उस इलाके में मल्टीनेशनल कंपनियां, कैफेटेरिया और सैकड़ों आदमी ,क्या नहीं था ? लेकिन वही  डिवाइडर पर  कई दिनों का भूखा प्यासा मानसून मरने के लिए पड़ा था। सैकड़ों लोग वहां से निकलते रहे लेकिन किसी ने झांक कर देखने की तकलीफ नहीं उठाई कि आखिर एक मूक जानवर वहां इतने समय से क्यों पड़ा है? मानसून मरता  उसके पहले ही  वहां काम करने वाले और आने जाने वाले लोगों की संवेदनाएं मर चुकी थीं।

मानसून एक स्ट्रीट डॉग है और इसीलिए मल्टीनेशनल कंपनियों और मॉल्स में आने वालों के लिए वो एक कुत्ता ही तो है और शायद उनके लिए एक सड़क के कुत्ते के जीने मरने से कोई फर्क पड़ता फिर भले ही वो उनके सामने ही क्यों न मर रहा हो और फिर भले ही वे किसी संस्था को फोन करके ही उसकी मदद कर सकते हों।

हालांकि लिखे पढ़े इंसान भले ही मानसून से मुंह मोड गए हों लेकिन एक ग्रामीण, जो कि शायद किसी मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी पाने जितना पढ़ा लिखा नहीं था,  ऐसा नहीं कर पाया और उसने मानसून के वहां इस हाल में पड़े होने की सूचना एक एनजीओ पॉश को दी। एनजीओ की टीम ने मानसून को वहां से उठाया और उसे अस्पताल ले गए। मानसून के ईलाज के लिए पैसों की जरुरत है और एनजीओ ने ईलाज में मदद के लिए सोशल मीडिया पर गुहार लगाई है।

लेकिन मानसून हमारी मल्टीनेशनल पॉश संवेदनाओं पर एक सवाल की तरह की खड़ा है या यूं कहना चाहिए कि पड़ा है। जिस इलाके में काम करने वाले एक कॉफी पीने पर एक लीटर दूध की कीमत से ज्यादा पैसे चुकाते हैं वहां पर कोई भी सड़क के भूखे कुत्ते को पांच रुपए के बिस्किट भी नहीं खिला सका?

मानसून केवल एक दिन वहां पड़ा नहीं रहा होगा। वो कई दिन तक इस हाल में रहा होगा। इस बीच उस  इलाके में मॉल, मल्टी नेशनल,कैफेटेरिया और इंसानों ने करोड़ों रुपए का धंधा किया होगा। लेकिन संवेदना किसी के पास नहीं थी कि आखिर एक बेजुबान वहां इस हाल में क्यों पड़ा है। निश्चत रुप से ये लोग केवल आधार कार्ड पर ही इंसान हैं।

मानसून जीना चाहता है। वो पोश के अस्पताल में है और आसपास जाने वाले एनजीओ के कार्यकर्ताओं को देखकर पूंछ हिलाता है। सैंकड़ों इंसानों ने उसकी तकलीफ को अनदेखा किया लेकिन उसका इंसानों पर से विश्वास नहीं उठा है। यदि आप मानसून की मदद करना चाहते हैं तो पोश से संपर्क कर सकते हैं। उसके ईलाज के लिए चार हजार रुपयों की आवश्यकता है

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