चार भूखे कुत्ते चार दिन तक मुर्गियों और बकरियों के साथ रहे लेकिन फिर भी उन्हें नहीं खाया,बल्कि उन्हें बचाया। क्या चार दिन का भूखा इंसान ऐसा करता?

तिरुअनंतपुरम (केरल)

क्या होगा यदि इंसान को 4 दिन तक बाढ़ या किसी अन्य आपदा के चलते भूखा प्यासा रहना पड़ जाए । जहां खाने को कुछ नहीं हो हां साथ में कुछ जिंदा मुर्गियां जरूर हों। निश्चित रूप से इंसान अपने जीने के लिए मुर्गियों को मार कर खा जाएगा, यही होगा न। लेकिन केरल में चार कुत्ते 4 दिन तक भूखे रहे जबकि उनकी साथ में 47 बकरियां और कई मुर्गियां थे लेकिन उन्होंने खुद के भूख से मरने की नौबत आ जाने पर भी इन्हें नहीं खाया। क्या संकट के समय कोई इतना संयम रख सकता है जितना इन चार भारतीय श्वानों ने रखा?

भारतीय स्ट्रीट डॉग्स को अकसर कमतर आंका जाता है। लोग उन्हें जंगली कहते हैं और उनकी बजाय विदेशी ब्रीड के पीछे भागते हैं। लेकिन बाढ़ग्रस्त केरल की यह कहानी आपको उनके बारे में अपनी धारणा बदलने पर मजबूर कर देगी। जी हां वही केरल जहां पर कुछ साल पहले इन स्ट्रीट डॉग्स की हत्या करना राजनैतिक दलों के बीच फैशन बन गया था। यहां पर चार दिन तक भूख से बेहाल चार कुत्ते उनके साथ मौजूद मालिक की बकरियों और मुर्गियों को खाने की बजाय उनकी देखरेख करते रहे।

यहीं पर हाल ही में आई बाढ़ के समय बस्ती में पानी जमा हो जाने के चलते निलांबुर के पास स्थित नेदुमकायम बस्ती में रहने वाली जानकी अम्मा को अपना घर छोड़ना पड़ा। जानकी अम्मा के पास चार कुत्ते, 47 बकरियां और बहुत से मुर्गे-मुर्गियां थे। जानकी अम्मा ने इन्हें खुला छोड दिया और वे अपने परिवार के साथ सुरक्षित स्थान पर चलीं गईं। लेकिन कुत्ते अम्मा की बकरियों और मुर्गियों के साथ ही रहे। वे इन्हें अपने साथ उस स्थान पर ले गए जहां पानी नहीं भरा था। ये कुत्ते बकरियों के बच्चों को मुंह में दबाकर सुरक्षित स्थान पर ले गए ताकि वे डूब न जाएं। वे चार दिन तक बिना खाए पीए इनकी देखभाल करते रहे। चार दिन बाद जब बस्ती का पानी खाली हुआ तो जानकी अम्मा घर वापस लौटीं। उन्हृोंने पाया कि उनकी 47 बकरियां और मुर्गियां चारों कुत्तों के साथ घर पर हैं। भूख के मारे इन सभी का बुरा हाल था। जानकी अम्मा ने इन्हें खाना खिलाया। ह्यूमन सोसाइटी इंटरनेशनल की समन्वयक सैली वर्मा ने जानकी अम्मा को बकरियों के लिए 100 किलो तथा कुत्तों के 50 किलो खाना उपलब्ध कराया। वे भी इस घटना को देखकर अभिभूत हैं।

इस पूरे मामले में सबसे खास बात यह है कि कुत्ते चार दिन तक भूखे रहे । वे चाहते तो कम से कम मुर्गियों को खाकर अपनी भूख मिटा सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया क्योंकि वे उन मुर्गियों के अपना परिवार मानते थे। यहां सवाल यह है कि यदि इंसान इन हालात में फंस जाता तो क्या वो मुर्गियों को छोड़ देता? संभवत: शाकाहारी इंसान भी जीने के लिए ऐसी परिस्थितियों में मुर्गी खा लेता लेकिन जंगली कहा जाना वाले इन कुत्तों ने ऐसा नहीं किया उल्टे यह संदेश दिया है कि विपरित परिस्थितियों में भी परस्पर विरोधी एक साथ रह सकते हैं।

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