शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास ने की मांग, अभी प्रश्नपत्र अंग्रेजी में तैयार होते हैं और उनका हिंदी में होता है अनुवाद

देश में शिक्षा के भारतीयकरण के लिए सक्रिय शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास (SSUN) ने मांग की है कि संघ लोक सेवा आयोग सहित (यूपीएससी) देश की अधिकांश परीक्षाओं के प्रश्न पत्र अंग्रेजी भाषा में तैयार होते हैं तथा बाद में इनका हिंदी में अनुवाद किया जाता है। जिससे कि इनमें कईं प्रकार की गलतियां रह जाती हैं। इससे हिंदी भाषी विद्यार्थियों को कठिनाई होती है। न्यास ने हिंदी भाषी विद्यार्थियों के प्रश्नपत्र हिंदी भाषा में ही तैयार करने की मांग की है।
न्यास के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह ने कहा कि यूपीएससी के प्रश्न पत्र का अंग्रेजी से हिंदी या अन्य किसी भाषा में अनुवाद करने से अशुद्धियां या गलतियां होती हैं और इससे एग्जाम दे रहे उम्मीदवारों पर प्रभाव पड़ता है। देवेंद्र सिंह ने कहा कि यूपीएससी प्रश्न पत्र को तैयार करने की प्रक्रिया अंग्रेजी पृष्ठभूमि वाले छात्रों का पक्षधर साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि पिछली बार 600 उम्मीदवारों ने सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की थी, इसमें सिर्फ 40 उम्मीदवार ऐसे थे जिन्होंने अंग्रेजी में एग्जाम क्लियर नहीं किया था।
इनमें मात्र 14 उम्मीदवारों ने हिंदी में परीक्षा दी थी। सिंह ने कहा कि वर्तमान में परीक्षा पैटर्न विज्ञान पृष्ठभूमि से आने वालों के पक्ष में है और इसमें सबसे ज्यादा महत्व रीजनिंग का होता है। यूपीएससी के प्रारंभिक परीक्षा में गणित को भी शामिल किया गया है। उन्होंने सुझाव दिया कि परीक्षा में सामान्य अध्ययन पर अधिक ध्यान देना चाहिए।

क्या है शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास


शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास भारत में शिक्षा एवं संस्कृति के क्षेत्र में कार्य करने वाला न्यास है। इसकी स्थापना १८ मई २००७ को की गयी थी। इसके संस्थापक दीनानाथ बत्रा हैं जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व प्रचारक तथा विद्या भारती के पूर्व निदेशक हैं। न्यास अपने सहयोगी संगठन शिक्षा बचाओ आन्दोलन समिति के निकट सहयोग से काम करता है। इसका लक्ष्य वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की वैकल्पिक व्यवस्था की स्थापना करना है।
इसकी प्राप्ति के लिये लिये यह संस्था शिक्षा के पाठ्यक्रम, प्रणाली, विधि और नीति को बदलने तथा शिक्षा के ‘भारतीयकरण’ को आवश्यक मानता है। इसमें एनसीईआरटी के पूर्व अध्यक्ष जगमोहन सिंह राजपूत, जेएनयू के कपिल कपूर और एबीवीपी के पूर्व सचिव अतुल कोठारी जैसे प्रमुख सदस्य सम्मिलित हैं।

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