10 किलो गेहूं के चक्कर में जेल गई 12 साल की लड़की, उसी पर है अपने दो भाई बहन और पिता के लिए खाना बनाने की जिम्मेदारी

सागर. 12 साल की मैना यह नहीं जानती कि खेलना क्या होता है लेकिन वह जरूर जानती है कि भूख क्या होती है? उसे नहीं पता कि जेल क्या है लेकिन उसे पता है उसके दो छोटे छोटे भाई घर पर भूखे होंगे। मैना अनुसूचित जाति की भी नहीं है जो कि उसके लिए सामाजिक न्याय के पुरोधा रोहित वेमुला की तरह क्रांति मचाएं। लेकिन उसकी कहानी सुशासन,सत्ता के मामा -भांजे के रिश्ते, विकास, जीडीपी, एफडीआई, इज ऑफ बिज़नेस डूइंग और गरीब परिवार से आने वाले प्रधानमंत्री के ऊपर बहुत बड़ा सवाल है। 

तीन साल पहले यानी कि जब मैना 9 साल की थी, उसकी मां चौथी संतान को जन्म देते समय मर गई। तबसे मीना डेढ़ सौ रुपए की दिहाड़ी मजदूरी करने वाले अपने पिता और दो छोटे छोटे भाईयों के लिए खाना बनाती है। वह छठी कक्षा में पढ़ती। उसका चूल्हा 4-6 ईंटों से बना है और बर्तन के नाम पर उसके पास चार छह ठीकरे हैं। 

मैना ने 10 किलो गेहूं आटा चक्की पर पिसाने के लिए रखे। जब बाद में वह गेहूं लेने गई तो चक्की वाला गेहूं रखने से मुकर गया और कहने लगा कि तुम्हारा गेहूं गुम हो गया है। 10 किलो गेहूं की कीमत का अंदाजा मैना को अच्छी तरह से था। उसे समझ नहीं आया की वह क्या करें? पहाड़ी पर स्थित दुर्गा मंदिर पहुंची उसने दान पेटी में रखे ढाई सौ रुपए निकाले। 180 रुपए के गेहूं खरीदे और घर पहुंच गई। चक्की वाले क्या भले ही सीसीटीवी कैमरा ना रखा हो जिससे यह साबित हो सके कि मैना ने चक्की वाले के यहां पिसाने के लिए गेहूं रखे थे। लेकिन मंदिर में सीसीटीवी मौजूद था जिसके सहारे ढ़ाई सौ रुपए के चोर को पकड़ लिया गया साथ ही उन पैसों से खऱीदा गया और धन यानी दस किलो गेहूं भी बरामद कर लिया गया।

पुलिस ने मामले में गजब की तेजी दिखाई और मैना को धारा 454 और 380 यानी गृह भेदन और चोरी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। उसे 45 किलोमीटर दूर किशोर न्यायालय ले जाया गया। वहां जाकर पता चला कि उसका मामला सुनने के लिए नियुक्त मैडम छुट्‌टी पर हैं। हालांकि नियमानुसार वहां पर सुनवाई करने के लिए किसी का होना आवश्यक है, वहां मौजूद सभी अधिकारी एक साथ छुट्‌टी पर नहीं जा सकते हैं। उसके बाद उसे सागर से पौने चार सौ किमी दूर शहडोल के बालसुधार गृह में भेज दिया गया। ढ़ाई सौ रुपए की चोरी में यह सब उस बच्ची के साथ हुआ जो कि अपने दो भाईयों के लिए मां की भूमिका में भी है और उसे यह सब उस चक्की वाले के चलते सहना पड़ा जो कि उसके दस किलो गेहूं के पिसाने के लिए रखे जाने से मुकर गया।

मामला संज्ञान में आने पर सागर की कलेक्टर प्रीति मैथिल नायक ने स्वयं कोर्ट जाकर मैना की जमानत कराई। साथ ही उसके पिता को रेडक्रॉस से दस हजार रुपए की मदद भी दिलाई है। लेकिन क्या मामला समाप्त समझ लिया जाना चाहिए?

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