उस किताब में क्या है जिसे आज राहुल गांधी लोकसभा में पढ़ना चाहते थे और अमित शाह, राजनाथ सिंह जिसका विरोध कर रहे थे
पूर्व चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ एमएम नरवाने की अप्रकाशित किताब का मामला
आज लोकसभा में उसे समय हंगामा की स्थिति बन गई जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के अभी भाषण पर अपना जवाब देते हुए एक किताब के कुछ अंश पढ़ने चाहे। राजनाथ सिंह से लेकर अमित शाह तक इस बात पर अड गए कि वह इस किताब के अंश को नहीं पढ़ सकते क्योंकि यह किताब प्रकाशित नहीं है? इसके चलते लोकसभा दो बार स्थगित हुई।

लोकसभा अध्यक्ष ने भी राहुल गांधी को यह हिस्से पढ़ने से मना किया लेकिन राहुल गांधी ने किताब पढ़ने की बजाय किस्सा खुद सुनाना शुरू कर दिया। जब इस पर भी उन्हें रोका गया तो उन्होंने भारत और चीन का नाम लेने की बजाय एक देश और दूसरे देश की बात करके किस्सा सुनाने की कोशिश की है। हालांकि राहुल गांधी इस किस्से को सदन में सुनने में अब तक कामयाब नहीं हुए हैं। लोकसभा दूसरी बार स्थगित कर दी गई है।
उस किताब में क्या है जिसके एक हिस्से को राहुल गांधी लोकसभा में पढ़ना चाहते थे?
यह किताब भारत के पूर्वके ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल एमएम नरवने की अप्रकाशित किताब है, जिसे प्रकाशन के लिए रक्षा मंत्रालय की स्वीकृति का इंतजार है। किताब का यह विवाद मुख्य रूप से उनके संस्मरण (memoir) वाली किताब “Four Stars of Destiny” से जुड़ा है।
जनरल मनोज मुकुंद नरवनें पूर्व भारतीय सेना प्रमुख (Chief of Army Staff, 2019-2022) रहे हैं, उनकी इस किताब के प्रकाशक Penguin Random House है।
किताब में क्या लिखा है?
पूर्व सेना प्रमुख ने इसमें अपने कार्यकाल की महत्वपूर्ण घटनाओं का जिक्र किया है, जैसे: 2020 में पूर्वी लद्दाख (Galwan Valley clash और LAC standoff) में चीन के साथ तनाव और गलवान झड़प। इस मुद्दे पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ हुई बातचीत (जैसे, चीनी सैनिकों की आवाजाही पर “carte blanche” दिए जाने का दावा)। इसके अलावा इसमें अग्निपथ योजन) की घोषणा और फैसले की प्रक्रिया के बारे में भी बताया गया है। किताब में दावा है कि ये योजना तीनों सेनाओं (Army, Navy, Air Force) को अचानक चौंका देने वाली थी, और बिना पर्याप्त चर्चा के आई।
सबसे खास बात है Carte Blanche
“Carte Blanche” शब्द फ्रेंच भाषा से आया है और इसका शाब्दिक अर्थ है “सफेद कागज” या “खाली कागज” (white/blank paper या blank document)।
किताब के अंश के अनुसार, 31 अगस्त 2020 की रात को पूर्वी लद्दाख में LAC (Line of Actual Control) पर तनाव चरम पर था। चीनी PLA (People’s Liberation Army) ने Rechin La पास पर टैंक्स और सैनिक भेजे थे, जो बहुत संवेदनशील स्थिति थी (करीब युद्ध की कगार पर)।
तब सेना प्रमुख जनरल नरवने ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से बात की। राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री से बात करने के बाद कहा “जो उचित समझो वो करो।”
जनरल नरवनें ने इसे carte blanche कहा यानी उन्हें पूरी छूट मिल गई थी कि वो स्थिति को कैसे हैंडल करें (टैंक्स पोजिशन करने से लेकर जरूरी एक्शन तक, लेकिन पहले फायर न करने का निर्देश था)।
किताब में लिखा है:
“I had been handed a hot potato. With this carte blanche, the onus was now totally on me. I took a deep breath and sat silently for a few minutes. All was quiet save for the ticking of the wall clock.
(मुझे एक गरम आलू यानी मुश्किल काम थमा दिया गया था। इस कार्ट ब्लांश के साथ, अब पूरी जिम्मेदारी मेरे ऊपर आ गई थी। मैंने गहरी सांस ली और कुछ मिनटों तक चुपचाप बैठा रहा। सब कुछ शांत था, सिवाय दीवार की घड़ी की टिक-टिक के।)