स्ट्रीट डॉग बना बॉडी गार्ड, रास्ता भटके बच्चे के साथ 27 किलोमीटर दौड़ती रही लूसी

जिस मोहल्ले ने उसके बच्चे फेंके उसी मोहल्ले के बच्चे के लिए वो 27 किमी दौड़ी

इंदौर।

देश के अलग-अलग भागों से बच्चों के गायब होने की खबरों के बीच मंगलवार की शाम इंदौर के बंगाली चौराहे इलाके से 11 साल का अथर्व गायब हो गया। वह घर से साइकिल चलाने के लिए निकला और फिर वापस नहीं लौटा तो उसके परिजनों ने उसकी खोज खबर ली और बाद में उसके गायब हो जाने की FIR पुलिस में दर्ज कराई। यह कहानी केवल एक बच्चे के गायब होने की नहीं बल्कि इंसानों द्वारा प्रताड़ित एक स्ट्रीट डॉग की इंसानियत की भी है। जिस स्टेट डॉग के बच्चों को मोहल्ले वाले कहीं दूर छोड़ आए थे वही स्ट्रीट डॉग मोहल्ले के बच्चे के लिए 27 किलोमीटर तक दौडी।

Lucy

दर असल अथर्व साइकिल की लॉन्ग राइड लेने के चक्कर में रास्ता भूल गया और भटक कर इंदौर से 27 किलोमीटर दूर शिप्रा पहुंच गया। वहां पर मौजूद कुछ लोगों ने घबराए हुए अथर्व को देखकर उससे बात की लेकिन घबराहट में वह अपने पिता का मोबाइल नंबर भी नहीं बता पाया। इस पर उन लोगों ने उसे अपने पास बैठा लिया और पुलिस को सूचना दी जब पुलिस अथर्व को साथ ले जाने लगी तो एक फीमेल स्ट्रीट डॉग बीच में आ गई और वह पुलिस को गुर्राने लगी। वह फीमेल स्ट्रीट डॉग अथर्व को हाथ लगाने नहीं दे रही थी। यह फीमेल स्ट्रीट डॉग अथर्व की कॉलोनी की थी। वह उसे खाना खिलाता है और उसने उसका नाम लूसी रखा है।

लूसी अथर्व के घर से 100 मीटर दूर कैलाशपुरी के शिव मंदिर के आसपास के इलाके में रहती है। जब अथर्व मंदिर जाता है, तब वह उसे खाना खिलाता है। वह अथर्व के घर तक नहीं आती क्योंकि अथर्व की गली की में जो दूसरे कुत्ते रहते हैं, वह उसे आने नहीं देते लेकिन इसके बाद भी लूसी का अथर्व के लिए लगाव कम नहीं है। आमतौर पर वह अथर्व को फॉलो नहीं करती लेकिन मंगलवार की शाम जब अथर्व साइकिल से निकला तो लूसी ने किसी अनहोनी की आशंका से उसे फॉलो किया और वह 27 किलोमीटर तक लगातार उसके पीछे दौड़ती रही।

जिस मोहल्ले ने उसके बच्चे फेंके उसी मोहल्ले के बच्चे के लिए वो 27 किमी दौड़ी

यह कहानी एक स्ट्रीट डॉग की भावनाओं और उसके अपने फीडर से लगाव की कहानी है जबकि मनुष्य के साथ लूसी के अनुभव बहुत अच्छे नहीं है। बताया गया है कि घटना के 5-6 दिन पहले ही मंदिर के आसपास के लोगों ने उसे उठाकर कहीं दूर छोड़ दिया था लेकिन वह से वापस आ गई। कुछ दिन पहले उसने जो बच्चे दिए थे, जिम बच्चे मर गए और शेष तीन बच्चों को मोहल्ले वालों ने कहीं दूर ले जाकर छोड़ दिया लेकिन लूसी के भीतर की ममता नहीं मरी।

हमने उसका वीडियो बुधवार की रात को बनाया और जब गुरुवार सुबह फिर उसे देखने के लिए पहुंचे तो वह वहां नहीं मिली। पूछने पर मंदिर के पुजारी के परिवार और आसपास वालों ने बताया कि वह यहां नहीं रहती उसे तो कुछ दिन पहले ही उठा कर कहीं दूर छोड़ आए थे। जब हमने बुधवार रात को लक का बनाया हुआ वीडियो दिखाना चाह तो पहले तो यह कहते हुए दूर जाने लगे कि हमारा वीडियो मत बनाओ। इससे पता चलता है कि लूसी वहां से दूर छोड़कर आने वाले लोग कौन थे? हमने लूसी को आसपास की गलियों में ढूंढा लेकिन वह नहीं मिली। हालांकि दोपहर को वह वही मिला और शाम को भी।

कहीं छोड़ दिए जाने का खतरा

इस पर अथर्व के पिता सुधीर पंडित से हमने बात की तो उन्होंने बताया कि बुधवार रात को जब अथर्व लूसी को दूध पिलाने गया था उस समय भी आसपास के कुछ लोगों ने कहा था कि तुम इसे अपने घर ले जाओ नहीं तो हम इसे फिर कहीं दूर छोड़ आएंगे उन्होंने आशंका जताई कि हो सकता है कि देर रात वह लोग लूसी को कहीं छोड़ आए हो। लूसी का डॉग बाइट का कोई रिकॉर्ड नहीं है। दरअसल मंदिर आने वालों को उससे यह समस्या है कि वह वहां गंदगी करती है। वहां के निवासी ने बताया कि जितनी समस्या उसे नहीं है उससे ज्यादा उसके बच्चों से थी इसके चलते उसके बच्चों को दूर छोड़ दिया गया है।

खास बात यह है कि हर साल लूसी जैसे स्ट्रीट डॉग कितने ही बच्चों को इस तरह से बचाते हैं लेकिन फिर भी मीडिया, हेटर्स, सरकार और सुप्रीम कोर्ट उन्हें कटघरे में खड़ा करता है और उन्हें हमेशा के लिए जेल भेजने की तैयारी में लगा हुआ है। लूसी की मुश्किलें कम नहीं है लेकिनशायद इस घटना के बाद लोगों का नजरिया उसके बारे में बदल जाए।

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