अगर राजनीति करना है तो कुत्ते से नफरत ना करें!
देखें मोदी से लेकर विजय गोयल तक के हाल
नेताओं को खासकर भाजपा नेताओं को श्वान से संबंध अच्छे रखना चाहिए। भाजपा वैसे भी खुद को सनातन की पैरोकार बताती है और सनातन में ऋग्वेद से लेकर महाभारत तक कुत्तों का महत्व बताया गया है। ऋग्वेद में सरामा से लेकर काशी के कोतवाल तकइनका महत्वपूर्ण स्थान है। इतिहास गवाह है कि जिस नेता ने स्ट्रीट डॉग्स के खिलाफ दुर्भावना रखी उसका राजनीतिक कैरियर डगमगाने लगा।

इसका उदाहरण उमा भारती खुद हैं। वह 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ना चाहती थीं। भोपाल में एक बच्चे पर डॉग अटैक के बाद उन्होंने एक ओपन लेटर लिखा जिसमें इसके समाधान की मांग की और हालांकि स्वयं को पशु और प्रकृति प्रेमी बताते हुए यह भी कहा कि जो भी समाधान में बाधा बने उसे दंड दिया जाए। उमा भारती को टिकट नहीं मिला।
दूसरा उदाहरण मैसूर से दो बार के सांसद प्रताप सिम्हा, जो पत्रकार भी रहे हैं और 2014 में पहली बार मैसूर से सांसद बने, 2019 में फिर जीते, ऐसा माना जा रहा था कि उनका राजनीतिक कैरियर बहुत चमकदार होगा। तभी उन्होंने मीडिया वालों से कहा कि जब वह स्ट्रीट डॉग्स की हत्या करें उस समय मीडिया वाले अपनी आंख बंद कर लें। इसके बाद प्रताप सिम्हा की राजनीतिक हत्या हो गई और उन्हें टिकट नहीं मिला। फिलहाल वह बिना हारे ही राजनीति से बाहर हो गए हैं..!!
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी ‘मन की बात’ में स्वदेशी नस्लों जैसे राजापलयम और कारवान हाउंड को अपनाने की बात की थी। हालांकि, उनकी सरकार की नीतियों, विशेष रूप से पशु कल्याण बोर्ड द्वारा स्वदेशी कुत्तों की नस्लों के प्रजनन इकाई को बंद करने के फैसले की आलोचना हुई। हालांकि नरेंद्र मोदीसीधे तौर पर इस निर्णय में शामिल नहीं थे लेकिन यह निर्णय उनकी सरकारमें लिया गया। इसे ज्योतिषीय दृष्टि से शनि के प्रभाव में असंतुलन का संकेत माना जाता है, क्योंकि स्वदेशी कुत्तों को भैरव और दत्तात्रेय से जोड़ा जाता है। क्या यही कारण है कि उनकी उन्हें 2024 के चुनाव में स्पष्ट बहुमत नहीं मिला..??
इसका तीसरा सबसे जीता जागता उदाहरण दिल्ली के पूर्व सांसदपूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहे विजय गोयल हैं। विजय गोयल दिल्ली में डॉग हेटर्स का चेहरा हैं। वे लंबे समय से इसे लेकर मुहिम चला रहे हैं। इसके लिए कई बार ट्रोल भी किए जाते हैं। एक समय दिल्ली के भावी मुख्यमंत्री माने जा रहे थे लेकिन अब उनके पास कुत्तों के विरोध के अलावा कोई काम नहीं बचा है। भाजपा उनसे कब का किनारा कर चुकी है..!!
क्या कहता है ज्योतिष?
इसका का एक ज्योतिषी आधार भी है। ज्योतिष शास्त्र में कुत्तों को शनि और केतु ग्रहों से जोड़ा जाता है, जो कर्म, न्याय और आध्यात्मिकता के प्रतीक हैं। कुत्ते वफादारी और रक्षा के भी प्रतीक माने जाते हैं। राजनीति में सक्रिय लोगों के लिए, जो अक्सर शक्ति और प्रभाव के क्षेत्र में काम करते हैं, कुत्तों से नफरत करना नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सकता है, क्योंकि यह शनि के प्रभाव को असंतुलित कर सकता है। शनि ग्रह निष्पक्षता और कर्मफल का कारक है, और कुत्तों के प्रति नकारात्मक भाव रखने से कर्मिक बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए अगर राजनीति में है तो भारतीय नस्ल के शान से संबंध सुधारें..!