4 साल से मोदी सरकार ने ABC प्रोग्राम के लिए कोई फंड नहीं दिया, फिर भी सुप्रीम कोर्ट सिस्टम की बजाय फीडर्स को हड़का रहा!

सागरिका घोष का संसद में सवाल पर सरकार का जवाब 2021-22 से ABC प्रोग्राम को शून्य फंडिंग


सुप्रीम कोर्ट में स्ट्रीट डॉग्स के मामले पर चल रही सुनवाई के दौरान लगातार यह तथ्य सामने आया है कि दरअसल समस्या सिस्टम की असफलता के चलते पैदा हुई है। इसके बावजूद एनिमल लवर के हिसाब से सुप्रीम कोर्ट के जज सिस्टम से ज्यादा फीडर्स की बाह मरोड रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने संसद में केंद्र सरकार से एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (AWBI) और एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) प्रोग्राम की फंडिंग पर सवाल किया। सरकार के जवाब ने खुलासा किया कि 2021-22 से ABC स्कीम्स के लिए शून्य फंड आवंटित किए गए हैं। बताइए जब केंद्र सरकार हीकुत्तों की नसबंदी के मामले में गंभीर न हो तो समस्या का जिम्मेदार किसे माना जाए?
सागरिका घोष ने राज्यसभा में उन्हें जो जवाब मिला है, 6 फरवरी 2026 को एक्स पर पोस्ट किया है।

पोस्ट में संसद जवाब की स्क्रीनशॉट्स हैं, जिसे सैकड़ों लाइक्स-रीपोस्ट मिले। कई यूजर्स ने सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए।
ABC प्रोग्राम stray dogs की स्टेरिलाइजेशन, वैक्सीनेशन और humane control के लिए है, लेकिन फंडिंग न मिलने से implementation प्रभावित।

क्या है जवाब में?

सरकारी जवाब का मुख्य बिंदु (लिखित उत्तर के अनुसार):

  • ABC प्रोग्राम्स के लिए 2021-22 से 2025-26 तक केंद्र स्तर पर कोई अनुदान आवंटित नहीं किया गया – यानी शून्य रुपये (Zero funds allocated)।
  • पूर्व वर्ष में अंतिम आवंटन: 2020-21 में ₹4,03,981 (जिसमें से ₹2,12,265 disbursed और utilised हुए थे)।उसके बाद पूर्ण रूप से बंद: 2021-22, 2022-23, 2023-24, 2024-25 और 2025-26 में ₹0 आवंटन।
  • संबंधित अन्य स्कीम्स में भी समुचित फंडिंग नहीं (जवाब में उल्लेखित): प्राकृतिक आपदा स्कीम्स 2023-24 में ₹0 फंड आवंटित। एम्बुलेंस स्कीम 2024-25 में आवंटित ₹36 लाख में से 0% disbursed (यानी ₹0 व्यय)।शेल्टर स्कीम्स 2024-25 में 64% ग्रांट्स अनडिस्बर्स्ड (कुल आवंटन का 64% जारी नहीं किया गया)।

सुप्रीम कोर्ट फीडर्स पर आंखें तरेर रहा!

सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई (2025-2026) में सिस्टम की नाकामी पर सवाल कम, लेकिन feeders पर ज्यादा फोकस दिख रहा है। जनवरी 2026 की हियरिंग्स में कोर्ट ने feeders को bites/injuries के लिए accountable ठहराने की बात कही “feeders may also be held responsible” (20 जनवरी 2026)। कोर्ट ने कहा कि attacks में municipal bodies के साथ feeders की भी जिम्मेदारी हो सकती है।

फीडर्स की प्रताड़ना पर निराशाजनक टिप्पणी

एक हियरिंग में feeders के harassment (खासकर women feeders पर anti-feeder vigilantes के हमले) पर कोर्ट ने कहा – FIR दर्ज कराओ, हाई कोर्ट जाओ (10 जनवरी 2026, जस्टिस विक्रम नाथ बेंच)। लेकिन critics और animal welfare groups का आरोप है कि कोर्ट feeders पर जितना सख्त टिप्पणियों से फीडर्स की मुश्किलें बड़ी है, इतना ही नहीं कुत्तों के खिलाफ क्रूरहा भी बड़ी है, भारी मात्रा में कुत्तों को जहर देकर मारे जाने कीखबरें मिल रही है।

जबकि सुप्रीम कोर्ट में राज्यों के एफिडेविट से यह बात स्पष्ट हो चुकी है की समस्या मूल रूप सेएब्स सिस्टम में हुए भ्रष्टाचार और लापरवाही के चलते पैदा हुई है। मामले में अब तक सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय निकायों में हुए भ्रष्टाचार की जांच की बात भी नहीं कही है । ऐसा नहीं है कि कोर्ट ने राज्यों के एफिडेविट पर कोई टिप्पणी न की हो। कोर्ट ने states को rebuke किया – affidavits “vague”, “eye wash”, “complete failure” कहा, लेकिन direct funding या capacity building पर मजबूत निर्देश नहीं दिए हैं।

जवाब एक और प्रमाण के रूप में सामने आया

राज्यसभा सांसद सागरिका घोष का सवाल इसी सिस्टम की असफलता को उजागर करता है केंद्र फंडिंग न देकर जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। एनिमल लवर का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट को सिस्टम (सरकारें, लोकल बॉडीज) पर उतनी ही सख्ती दिखानी चाहिए जितनी feeders या समस्या पर। humane solution के लिए ABC को scale पर लागू करना जरूरी, लेकिन accountability gap से समस्या बढ़ रही है।

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