नरवणे की किताब पर पेंगुइन का झूठ!
किताब पब्लिशर सहित पांच ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिक रही थी!
यूट्यूब पर वीडियो से हुआ खुलासा
पूर्व चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की किताब Four stars of destiny को लेकर गहना-गहमी बनी हुई है। जहां सोमवार को किताब की प्रकाशक पेंगुइन इडिया ने किताब के अप्रकाशित होने की बात कही तो वहीं मंगलवार को इस मामले में एक FIR भी दर्ज की गई लेकिन इस बीच यह खुलासा भी हुआ कि किताब जनवरी 2014 में पब्लिश हो गई थी और प्रकाशक पेंगुइन इंडिया के अलावा चार अन्य ऑनलाइन बुक सेलर प्लेटफार्म पर मौजूद थी। मंगलवार को 10:30 बजे पेंगुइन ने इसे अपनी वेबसाइट से हटाया। इसका खुलासा यूट्यूब पर एक वीडियो से हुआ।
हाल ही में सोशल मीडिया और न्यूज़ सर्किल में चर्चा का विषय बना है कि पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने जनरल मनोज नरवणे की आगामी पुस्तक को “अप्रकाशित” (unpublished) बताते हुए विवादास्पद बयान दिया था। पेंगुइन ने एक सूचना जारी करके कहा था की किताब का प्रकाशन नहीं हुआ है और यह कहीं भी मौजूद नहीं है। इसके अलावा पेंगुइन इंडिया ने यह भी कहा कियदि किसी के पास किताब की हार्ड या सॉफ्ट कॉपी पाई जाती है तो उसके खिलाफ कॉपीराइट एक्ट में कार्रवाई की जाएगी।
लेकिन हकीकत कुछ और ही निकली। मंगलवार की सुबह गूंज नाम के एक यूट्यूब चैनल ने वीडियो बना कर दिखाया कि मंगलवार को भी जनरल नवाने की किताब पेंगुइन इंडिया की वेबसाइट पर मौजूद थी। इतना ही नहीं इस वेबसाइट पर किताब के मिलने के तीन और लिंक भी दिए गए थे जिनमें से एक अमेजॉन का था। वही दो बुक वैगन और बुक स्केप के थे। यहां पर भी यह किताब 699 रुपए में मौजूद थी और साथ में यह जानकारी भी थी कि किताब का प्रकाशन 12 जनवरी 2024 को हुआ है।
11:00 बाद हटाई किताब
गंज के यूट्यूब पर पोस्ट किए गए वीडियो में बताया गया है किसुबह लगभग 11:00 तक नरवानी की किताब 4 स्टार्स का डेस्टिनी पेंगुइन इंडिया सहिततीन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मौजूद थी । बाद में इसे यहां से हटाया गया है। इसके अलावा पेंगुइन इंडिया का पुराना ट्वीट भी वायरल हो रहा है जिसमें उन्होंने शहीद दिवस पर किताब को बुक करने की बात कही थी। एक तरह से यह इस किताब का प्रमोशन था।
एक यूट्यूब शॉर्ट वीडियो में इस पूरे मामले को “पेंगुइन का झूठ” करार देते हुए दावा किया गया है कि प्रकाशक ने जानबूझकर गलत जानकारी फैलाई। वीडियो में दिखाया गया कि कैसे 24 घंटे के भीतर किताब “प्रकाशित” से “अप्रकाशित” हो गई। यह घटना प्रकाशन जगत में पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल उठा रही है। कई विश्लेषकों का मानना है कि यह या तो तकनीकी गड़बड़ी थी या फिर किसी दबाव में दिया गया बयान, जिसे बाद में सुधारा गया। या फिर पेंगुइन इस मामले में सरकार के दबाव में है! कुल मिलाकर किताब का मामला फिलहाल ठंडा पड़ता नहीं दिख रहा है।
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