महापौर की गली में सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर की अवहेलना

सुप्रीम कोर्ट की मनाही के बाद अपनी गली से उठवाएं स्टेरलाइज्ड स्ट्रीट डॉग्स

इंदौर । 

7 नवंबर को सर्वोच्च न्यायालय ने केवल बस और रेलवे स्टेशन, अस्पताल तथा स्कूल और कॉलेज से स्ट्रीट डॉग्स को हटाने के निर्देश दिए थे लेकिन इन निर्देशों की आड़ में महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने अपनी गली के आवारा कुत्ते उठवा दिए हैं। आदेश आने के पहले भी रेजिडेंसी स्थित महापौर सचिवालय के आसपास के कुत्ते उठवाए गए थे। जिन्हें बाद में दिल्ली से एनिमल एक्टिविस्ट के फोन आने पर छोड़ा गया था। यह मामला सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की अवमानना का है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा कुत्तों के रीलोकेशन पर लगाई गई रोग बरकरार है, केवल 7 नवंबर के आदेश में दिए गए स्थान से ही कुत्ते उठाने जा सकते हैं। 

7 नवंबर को स्ट्रीट डॉग्स के मामले में सुप्रीम कोर्ट का आर्डर आने के बाद से ही जैसे इंदौर नगर निगम कुत्तों को हटाने के लिए उधार बैठी थी। शहर की चरमराई हुई ट्रैफिक व्यवस्था, गड्ढेदार सड़कों और वर्षों से उलझे हुए ब्रिज के काम को छोड़कर नगर निगम, उसके महापौर और निगम आयुक्त कुत्तों के पीछे हाथ धोकर पड़ गए। बिना शेल्टर होम तैयार किए और उन्हें एनिमल वेलफेयर बोर्ड से रजिस्टर कराए, एबीसी सेंटर में कुत्तों को जमा करने का काम शुरू कर दिया गया। वैसे तो यह भी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का मजाक बनाना ही है लेकिन सुप्रीम कोर्ट का आदेश की असली अवमानना इंदौर के महापौर की गली में हुई।

महापौर पुष्यमित्र भार्गव की गली में 13 नवंबर को नगर निगम के अमले ने पहले से ही स्टरलाइज्ड और वैक्सीनेटेड डॉग्स को उठाया जबकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश केवल स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, रेलवे और बस अड्डे से कुत्तों को हटाने के हैं। चिड़ियाघर प्रभारी और इस काम को देख रहे डॉक्टर उत्तम यादव ने स्वीकार किया कि यह कुत्ते महापौर पुष्यमित्र भार्गव के कहने पर उठाए गए हैं। इंदौर के एनिमल एक्टिविस्ट ने इसकी जानकारी दिल्ली में उन लोगों को दी जो कि इस मामले को एनिमल एक्टिविस्ट की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में देख रहे हैं। उन्होंने कहा है कि यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना है और इस मामले में इंदौर महापौर के खिलाफ अवमानना का नोटिस दिया जाएगा।

महापौर बनने के बाद से ही पुष्यमित्र भार्गव कई अवसरों पर कुत्तों के प्रति अपनी नफरत प्रदर्शित कर चुके हैं। उन्होंने कुत्ते हटाने की अनुमति लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने तक की बात भी कही थी।  कुछ समय पहले भी उन्होंने और निगम आयुक्त ने रेसीडेंसी क्षेत्र से कुत्ते उठवाए थे जिसे एनिमल एक्टिविस्ट के दबाव में वापस छोड़ा गया था। हालांकि भार्गव स्वयं को स्वयंसेवक बताते हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत स्वयं कुत्तों को इस तरह से हटाए जाने का विरोध कर चुके हैं। इसके बावजूद कुत्तों को लेकर उनके रुख में कोई परिवर्तन नहीं आया है।

इंदौर में हुई आदेश की मनमानी व्याख्या!

एनिमल एक्टिविस्ट कार्तिक तवर ने बताया कि इंदौर मेंप्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर की मनमानी व्याख्या की है। ऑर्डर पर अमल करने के लिए 8 सप्ताह का समय दिया गया जिसमें पहले दो सप्ताह का समय सुविधाएं जुटाना और योजना बनाने का था लेकिन नगर निगम ने बिना किसी तैयारी और योजना के कुत्ते उठाने शुरू कर दिया और उन्हें एबीसी सेंटर में रख दिया गया है। खास बात यह है कि यह सारा काम एबीसी केंद्र संचालन में लगे कर्मचारियों से कराया जा रहा है और केंद्र में अब परमानेंट कुत्ते रख दिए गए हैं जिससे की नसबंदी का काम ठप हो गया है। उन्होंने बताया कि हमने इस मामले में कलेक्टर को आवेदन दिया है। 

एनिमल एक्टिविस्ट और पीपल फॉर एनिमल्स से जुड़ी प्रियांशु जैन ने कहा कि एबीसी केंद्र की मॉनिटरिंग कमेटी में होने के बावजूद उन्हें केंद्र पर जाने नहीं दिया गया। उन्होंने बताया किनगर निगम को कुत्तों को रखने के लिए जो स्थाई शेल्टर बनाने हैं उसे भी एनिमल वेलफेयर बोर्ड में पंजीयन कराया जाना जरूरी है। लेकिनबिना किसी तैयारी केनगर निगम ने कुत्ते उठाने शुरू कर दिए हैं। हाल यह है कि सुप्रीम कोर्ट का निर्देशों को तात्पर्य कर जिसकी मर्जी हो रही है वहां से कुत्ते उठाने जा रहे हैं। इसकी जानकारी हमने सुप्रीम कोर्ट में इंटरविनर बने एनिमल एक्टिविस्ट को दे दी है। जल्द ही वह अवमानना की कार्रवाई भी शुरू करेंगे। 

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