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रेल पटरी टूटी तो अधिकारियों को मोबाइल पर मिलेगा संदेश

CEL के इंजीनियरों की इस खोज BRDS सिस्टम के बारे में जानिए

गाजियाबाद

कुछ ऐसा हो कि रेल दुर्घटनाएं पूरी तरह से सुरक्षित हो जाएं। रेल के बेपटरी होने जैसी घटनाओं पर रोक लग जाए। लोग पूर्ण सुरक्षित यात्रा का आनंद लें। अगर किसी प्रकार की दिक्कत आए तो पहले से ही इससे निपटने की तैयारी हो। यात्रियों को जान की हानि जैसी नौबत न झेलनी पड़े। रेल दुर्घटनाओं को शून्य बनाने के लिए कई स्तर पर काम हो रहे हैं। इस क्रम में उत्तर प्रदेश के साहिबाबाद इलाके में स्थित उपक्रम सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (CEL) के इंजीनियरों ने एक ऐसी तकनीक का इजाद किया है, जिसके माध्यम से रेलवे लाइन की पटरी टूटने या चटकने का संदेश तत्काल प्रभाव से रेलवे के अधिकारियों को उनके मोबाइल पर मिल सकेगा।

इससे रेल हादसों में निश्चित तौर पर कमी आएगी। इस तकनीक का इस्तेमाल फिलहाल दिल्ली मेट्रो ट्रेन की पटरी ऊपर किया गया है। इसका सफल ट्रायल भी हो चुका है। आने वाले समय में मेट्रो ट्रेन की पटरियों पर बॉटनिकल गार्डन से कालकाजी मंदिर स्टेशन के बीच लगाया जाएगा। इसके बाद इसे भारतीय रेलवे की पटरी ऊपर भी लगाए जाने की योजना बनाई जा रही है।


सर्दियों में लाइन चटकने का आता है अधिक मामला

अक्सर देखने में आता है कि सर्दियों में ट्रेन की पटरी चटकने या टूटने का खतरा अक्सर बना रहता है। इसके कारण ट्रेन हादसा होने का खतरा बना रहता है। इस समस्या से निपटने के लिए अब सीईएल के इंजीनियरों ने ब्रोकन रेल डिटेक्शन सिस्टम (BRDS) बनाया है। इस सिस्टम को पटरियों में 500 मीटर की दूरी पर लगाया जाएगा। अगर इसके दायरे में आने वाली पटरी टूटती है या चटकती है तो तत्काल इसका संदेश रेलवे अधिकारियों के मोबाइल पर पहुंच जाएगा। समय रहते ही पटरियों की मरम्मत की जा सकेगी। अगर किसी ट्रेन को उस समय इलाके से गुजरना होगा तो उन्हें पहले ही स्टेशनों पर रोका जा सकेगा। इससे हादसे को टालने में मदद मिलेगी।

रेलवे लाईन टूटने या चटकने का आएगा मैसेज

चेतन प्रकाश जैन ने बताया कि इस सिस्टम को सुचारू रूप से रखने के लिए रेलवे स्टेशन पर एक कंट्रोल रूम बनाया जाएगा। सभी जगह पर लगाए गए बीआरडीएस की जानकारी कंट्रोल रूम के कंप्यूटर स्क्रीन पर उपलब्ध रहेगी। इसके लिए अलग से एक सॉफ्टवेयर भी तैयार किया गया है।य ह सॉफ्टवेयर रेलवे अधिकारियों के मोबाइल पर अपडेट किए जाएंगे। इसके बाद से किसी भी स्थान पर यदि रेलवे लाईन टूटती है या चटकती है तो उसका संदेश रेलवे के अधिकारियों के मोबाइल फोन पर पहुंच जाएगा। उधर कंट्रोल रूम में भी हूटर बजेगा, जिस स्थान पर पटरी टूटी है।

इससे पटरी टूटने की लोकेशन का भी आसानी से पता लगाया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि इसकी रेंज फिलहाल 500 मीटर की दूरी की निर्धारित की गई है। रेंज बढ़ाने के लिए इंजीनियर रिसर्च कर रहे हैं। कम लागत में इसकी रेंज भी बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए सीईएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक चेतन प्रकाश जैन ने बताया कि रेलवे की पटरी टूटने या चटकने की जानकारी रेलवे अधिकारियों को तत्काल मिले, इसके लिए इंजीनियरों ने आत्मनिर्भर भारत के तहत बीआरडीएस सिस्टम इजाद किया है। इसका दिल्ली मेट्रो की पटरी पर सफल ट्रायल हो चुका है। दिल्ली में मेट्रो की अन्य पटरियों पर भी इसे लगाया जाएगा। साथ ही, भारतीय रेलवे की पटरी ऊपर भी लगाए जाने की योजना तैयार की जा रही है। इस सिस्टम के तहत पटरी के चटखने या टूटने की स्थिति में तत्काल अधिकारियों के मोबाइल पर मैसेज जाएगा। अगर कोई असामाजिक तत्व पटरी को तोड़कर रेल दुर्घटना जैसी स्थिति पैदा करने की कोशिश करेगा तो इसकी भी जानकारी रेलवे प्रशासन को मिल जाएगी। रेल यात्रा को सुरक्षित बनाने में यह सिस्टम क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।

ऐसे काम करेगा सिस्टम

चेतन प्रकाश जैन ने बताया कि इस सिस्टम को सुचारू रूप से रखने के लिए रेलवे स्टेशन पर एक कंट्रोल रूम बनाया जाएगा। सभी जगह पर लगाए गए बीआरडीएस की जानकारी कंट्रोल रूम के कंप्यूटर स्क्रीन पर उपलब्ध रहेगी। इसके लिए अलग से एक सॉफ्टवेयर भी तैयार किया गया है।य ह सॉफ्टवेयर रेलवे अधिकारियों के मोबाइल पर अपडेट किए जाएंगे। इसके बाद से किसी भी स्थान पर यदि रेलवे लाईन टूटती है या चटकती है तो उसका संदेश रेलवे के अधिकारियों के मोबाइल फोन पर पहुंच जाएगा। उधर कंट्रोल रूम में भी हूटर बजेगा, जिस स्थान पर पटरी टूटी है।

इससे पटरी टूटने की लोकेशन का भी आसानी से पता लगाया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि इसकी रेंज फिलहाल 500 मीटर की दूरी की निर्धारित की गई है। रेंज बढ़ाने के लिए इंजीनियर रिसर्च कर रहे हैं। कम लागत में इसकी रेंज भी बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

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