देश के सामने खड़ी सबसे बड़ी चुनौतियां

2019 के लोक सभा चुनाव के सारे मतदान अब खत्म हो चुके है। सरकार कोई भी बनाए, किन्तु समस्या हमे नही भूलनी चाहिए। वो समस्याए जो कुछ वर्षो के अंदर हमारे राष्ट्र को छिन्न-भिन्न कर देंगी। वे समस्याए जो किसी एक कानून से ठीक नही हो सकती। वो समस्याए जिसके लिए इस राष्ट्र को अपने धर्म और विवेक से हल करना होगा।

राष्ट्र की इस समय की सबसे बड़े समस्याए है –

(१). इस्लामिक जिहाद
(२). वामपंथ
(३). धर्म निरपेक्षता

(१). इस्लामिक जिहाद – इस राष्ट्र में एक विशेष समुदाय है। जो कुछ दशकों पूर्व अलग देश की मांग कर देश के दो टुकड़े कर गया। किन्तु इस देश को भी छोड़कर नही गया। आज भी वह देश को एक इस्लामिक देश बनाने का ख्वाब दिल मे रख कर। चार-चार बच्चे पैदा करते है। वे उस टुकड़े बांग्लादेश से भी घुस कर यह आते है। जहाँ पर एक आम हिन्दू दो से ज्यादा बच्चे नही पैदा करता। वह एक आम मुसलमान कम से कम तीन बच्चे तो पैदा करता ही है। कम पड़े तो चार बिबिया भी रख सकता है।

जब उनकी संख्या ज्यादा होगी तो वे सरकारी नौकरियों में ज्यादा होंगे। पुलिस में ज्यादा होंगे, उनके डॉक्टर ज्यादा होंगे, उनके नेता ज्यादा होंगे।

और इतिहास – वर्तमान दोनों साक्षी है कि जीस देश मे इस्लामिक जन संख्या बढ़ जाती है। वहां गैर मुसलमान कुछ दशकों में या तो जबरदस्ती मुसलमान बना दिया जाता है, भगा दिया जाता है, या फिर मार दिया जाता है।

-पाकिस्तान में सिख, हिन्दू, जैन नही बचे..
-बांग्लादेश में हिन्दू नही बचे..
-ईरान ने पारसी नही बचे..

जहा इनकी जन संख्या बढ़ेगी वहां मानवता कुचल दी जाएगी। आज हमें चाहिए कि सरकार पर दबाव बनाया जाए और जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाया जाए। सभी के लिए एक समान कानून हो तभी असली समानता आएगी।

(२). वामपंथ – यह वो सड़ी हुई विचार धारा है जो दुनिया भर से लात मारकर निकाली जा चुकी है। यह आलसी, कमजोर और मेहनत से डरने वाले लोगो की विचारधारा है। यह वही विचारधारा है जिसने नेताजी शुभाष चंद्र बोस के खिलाफ अंग्रेजो का समर्थन किया था। यह वही लोग है जिन्हीने देश के विभाजन का समर्थन किया था। यह वही लोग है जिन्होंने भारत-चीन युद्ध के समय चीन के समर्थन किया था।

ये वामपंथी वही है जो आज JNU में भारत को तोड़ने के नारे लगाते है। इनका उद्देश्य बस भारत के टुकड़े करना है। यह वामपंथी शिक्षा, बॉलीवुड, मीडिया के जरिये दिमागी खेल खेलते है। यह जंगल मे छिपकर नक्सल रूप धारण कर हमारे विकास को भी रोक रहे है।

जो भी राष्ट्रीय भावना का सामान नही करे, जो विदेशी लेनिन, माओ, मार्क्स के सिद्धांतों को भारत मे चाहे – वे है वामपंथी। जिस वामपंथ के कारण देश के देश भूखे मर गए। वह वामपंथ खुशकिस्मती से हमारे देश मे समाप्त हो रहा है।

आज वामपंथ शक्ति बस दो हो क्षेत्रो में रखता है – केरल और मीडिया। हर भारतीय जो भारत माता की वंदना करता है। यह उसका फर्ज है कि इन देश द्रोहियो का देश से सम्पूर्ण नाश किया जाए।

(३). धर्म निरपेक्षता – यह एक बीमारी है जो ज्यादातर बस हिन्दू को होती है। इस बीमारी में यदि हमारे सामने कोई हमारी मान्यताओं का अपमान करे। तो हमे कोई तकलीफ नही होती, हमे कोई पीढ़ा नही होती।

जिस व्यक्ति को अपने धर्म, अपने ग्रंथो का रत्ती भर भी ज्ञान नही हो- वही धर्म निरपेक्ष हो जाता है। फिर तो बस अपने नाम के अंत मे एक हिन्दू उपनाम लेकर वह अपना जीवन काटता रहता है। उसने अपनी राष्ट्र की सुरक्षा का कोई ध्यान नही। उसे अपने धर्म पर हो रहे आघात के बारे जानकारी तक नही। किन्तु दूसरा मजहब उसे हमेशा अच्छा दिखाई देता है।

धर्म निरपेक्षता वही बीमारी है जिसने मोहनदास गांधी को यह कहने पर मजबूर किया था। कि यदि मुसलमान बलातकार करे तो हिन्दू महिला उसे चुप-चाप सहले। धर्म निरपेक्षता वह रोग है जो हमे एक दिन अचानक खत्म कर देगा और हमे पता तक नही चलेगा।

अब समय है हर हिन्दू सीना ठोक कर गर्व से कहे कि हम हिन्दू है। हम श्री राम, श्री कृष्णा और हनुमान के वंशज है। हमे चाहिए कि अपने धर्म की शिक्षा हर हिन्दू तक पहुचे। अपने घरों में, परिवारों में वैदिक रीति रिवाजों को जोरो शोरो से प्रचलित करे। वो सड़क रोक कर भी नमाज पढ़ लेते है और हम दिन में एक दिया जलाने में भी सोचते है।

This article is written by DS Balaji. Views expressed here is his personal views.

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