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PM Cares में 2.5 लाख देने वाले का मोदी से सवाल कितने पैसे देता तो मां को बेड मिल जाता ?

मामला गुजरात का, मां की इलाज न मिलने से मौत… शख्स ने पूछा- ‘अब और कितना दूं ताकि…?’

अहमदाबाद

ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए अभी कुछ भी सही नहीं हो रहा है। अब उन्हीं के गृह राज्य गुजरात का एक मामला सामने आया है। जिसमें पीएम केयर्स फंड में 2.51 लाख रुपए का दान देने वाले एक व्यक्ति की मां मौत ईलाज न मिलने के चलते हो गई है।

यह व्यक्ति कोरोना से पीड़ित अपनी मां को ईलाज के लिए लेकर एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकता रहा लेकिन उनकी मां को कहीं बेड नहीं मिला। उनका दर्द और गुस्सा सोशल मीडिया पर छलका। महामारी के दौरान उन्होंने पीएम केयर फंड को ढाई लाख रुपये दान दिए थे लेकिन उनकी मां की मौत बिना इलाज के हो गई।

अहमदाबाद के रहने वाले विजय पारिख ने अपनी मां के निधन से दुखी होकर अपने ट्विटर अकाउंट से एक पोस्ट की। पोस्ट में उन्होंने लिखा कि ढाई लाख रुपये का दान मेरी मरती हुई मां के लिए बिस्तर सुनिश्चित नहीं कर सका। मुझे और कितना दान देना होगा।

विजय ने किया यह ट्वीट

विजय पारिख ने ट्वीट किया, ‘2.51 लाख रुपये का दान भी मेरी मरती हुई मां के लिए बेड नहीं दिला सका। कृपया सलाह दें कि मुझे तीसरी लहर के लिए बेड रिजर्व करने के लिए और कितना दान करना चाहिए? ताकि मैं और सदस्यों को न खोऊं।’

दान की रसीद भी की पोस्ट

देश में पहली COVID लहर आने के बाद जुलाई 2020 में पारिख ने 2.51 लाख रुपये का दान दिया था। उन्होंने इस दान का स्क्रीनशॉट भी अपनी पोस्ट के लिए अटैच किया। उनका ट्वीट वायरल हो गया है और इसे 33 हजार से ज्यादा लाइक्स मिले हैं। 13 हजार से ज्यादा लोगों ने इसे रीट्वीट किया और एक हजार से ज्यादा लोगों ने कॉमेंट किया है।

मिले ऐसे जवाब

अहमदाबाद निवासी विजय ने अपने इस ट्वीट में पीएमओ, राजनाथ सिंह, आरएसएस और स्मृति ईरानी को भी टैग किया। लोगों ने उनके इस ट्वीट पर तरह-तरह से कॉमेंट किए। एक अन्य यूजर ने कहा कि दान स्वैच्छिक है और पूरी मानवता के लिए एक निस्वार्थ कार्य है, इसे आपकी पीड़ा या लाभ को आपके योगदान से जोड़कर देखा जा सकता है।

बहरे अधिकारियों से सवाल करने का यही एकमात्र तरीका

पारिख ने यूजर को जवाब दिया, कि बधिर अधिकारियों से सवाल करने का यही एकमात्र तरीका है। समाज में कभी भी कोई योगदान सार्वजनिक नहीं किया है, यह सोचकर कि यह हमारा कर्तव्य है। लेकिन जब हम अपने मूल अधिकारों से वंचित हैं तो हमें सभी उपलब्ध साधनों को अपनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘पैसा कोई मुद्दा नहीं है। मैं अपनी सारी सेविंग्स दान कर सकता हूं अगर कोई यह आश्वस्त करे कि अब मेरे जैसा कष्ट किसी को नहीं मिलेग

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