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#936 दिन, पांच हड़तालें और लाखों ट्वीट्स, फिर भी बैंकर्स वहीं के वहीं

नई दिल्ली .

31 महीने के इंतजार के बाद भी वेज रिवीजन का मामला नहीं सुलझने से बैंक कर्मचारियों में आक्रोष बढ़ता जा रहा है। जहां पहले इस मामले में बैंकर्स अपनी यूनियनों के भरोसेे इस लड़ाई को लड़ रहे थे वहीं अब उन्होंने इसे लेकर सोशल मीडिया का रुख किया है। अब तक इस मामले को सुलझाने में आईबीए और सरकार की ओर से कोई पहल नहीं हुई है। इसके चलते प्रतिक्रियाएं तीखी होती जा रही हैं।

हालांकि ये अब तक का इतिहास है कि कभी भी बैंकर्स का वेज रिवीजन उनके तय समय पर नहीं हुआ है। इसमें हमेशा से देरी हुई है। ये देरी पांच से लेकर 32 महीनें तक की है। इस बार भी 31 महीनें हो चुके हैं और ये मुद्दा सुलझ नहीं रहा है।

बैंकर्स का कहना है कि बैंक कर्मचारियों की बेसिक सैलेरी उनके समकक्ष केद्र सरकार के कर्मचारियों की आधी है। आईए जानते हैं कि दोनों के वेतन में कितना अंतर है।

श्रेणी केंद्रीय कर्मचारी बैंक कर्मी अंतर

sub staff 18000 9560 8440

Cleark 22500 11765 10735

Officer scale 1 56100 23700 32400

Manager scale 2 67700 31700 36000

Manager scale 3 78800 42020 36780

आंकड़े 1 जनवरी 2018 के अनुसार

फिलहाल लॉकडाउन का वातावरण है और इसके चलते इस संबंध में लड़ाई सोशल मीडिया पर ही चल रही है। लेकिन अब बैंक कर्मियों की पोस्ट देखकर लगता है कि उनका सब्र अब जवाब दे रहा है। अब वे आईबीए, सरकार और अपनी यूनियन पर जमकर कटाक्ष कर रहे हैं। यहां तक एंप्लाई स्टॉक पर्चेस सकीम (ESPS) में मिले शेयर्स में कर्मचारियों को हो रहे नुकसान भी गिनाए जा रहे हैं।

बैंकर्स ने फिर हैशटैग चलाया

पांच दिन पहले बैंकर्स ने हैशटैग बैंक निर्भर भारत ट्रोल किया था। इसके बाद से वे सतत सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं। सोमवार को फिर उन्होंने #935 दिन ट्रोल किया। इसके साथ ही #YouFailedBankers भी। बैंकर गुप्ता नाम के ट्वीटर हैंडल से भी कुछ इस तरह से सरकार पर कटाक्ष किए गए।

ट्वीट्स देखऱ्कर लगता है कि बैंकर्स को अपनी यूनियनो औऱ आईबीए पर कोई भरोसा नहीं रहा है और जहां तक सरकार का सवाल है तो उसके लिए यह स्थिति खतरनाक हो सकती है।

जानें : एक बैंककर्मी की व्यथा

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