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मध्यप्रदेश में गुजरात की तर्ज पर होगा पूरे मंत्रिमंडल का इस्तीफा! 

मध्यप्रदेश में भी होगा भूपेंद्र पटेल मॉडल का प्रयोग

नई दिल्ली। 

सुनने में आया है कि भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने मध्यप्रदेश में गुजरात फार्मूला अपनाने की तैयारी कर ली है। जिस तरह से गुजरात में विजय रूपानी सरकार से इस्तीफा लेकर गुमनाम से भूपेंद्र पटेल को मुख्यमंत्री बनाया गया था अब उसे मध्यप्रदेश में दोहराया जा सकता है। पार्टी का मानना है कि गुजरात और मध्य प्रदेश में पार्टी की स्थिति एक जैसी है इसके चलते जो फार्मूला गुजरात में इतिहासिक जीत दिलाने में कारगर रहा वहीं मध्य प्रदेश में सत्ता पाने का रास्ता सुगम बनाएगा। 

गुजरात के 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने किसी तरह से अपनी सत्ता बचाई थी ।पिछले 6 चुनाव में यह पहला अवसर था जब पार्टी 2 अंकों में सिमट गई थी हालांकि बाद में ऑपरेशन कमल के जरिए पार्टी ने आरामदायक बहुमत की स्थिति प्राप्त कर ली थी। 

लेकिन 2022 के चुनाव की तैयारी में पार्टी ने मुख्यमंत्री विजय रूपानी और उनकी पूरी कैबिनेट से इस्तीफा ले लिया था और उसके बाद भूपेंद्र पटेल को राज्य की बागडोर सौंप दी थी। सत्ता परिवर्तन में मंत्रिमंडल में भी बदलाव देखा गया था और कई स्थापित चेहरों की छुट्टी कर दी गई थी। भारतीय जनता पार्टी के लिए मध्यप्रदेश विधानसभा के पिछले चुनाव बहुत आरामदायक नहीं थे और पार्टी पिछले दरवाजे से सत्ता में आई है। इसे देखते हुए केंद्रीय नेतृत्व को लग रहा है कि मध्य प्रदेश में भी गुजरात फार्मूला दौरा कर पार्टी जीत दर्ज कर सकती है। इसके चलते माना जा रहा है कि नए साल में शिवराज सिंह चौहान सरकार से त्यागपत्र लिया जा सकता है और उनके स्थान पर मध्यप्रदेश में किसी भूपेंद्र पटेल जैसे लो प्रोफाइल नेता सरकार की बागडोर सौंपी जा सकती है। 

टिकट भी कटेंगे

बताया जा रहा है कि मध्य प्रदेश में बहुत से नेता 2003 से लगातार चुनाव लड़ रहे हैं और अब पार्टी ने इन्हें भी बदलने का मन बना लिया है। हालांकि सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जब इस तरह का प्रस्ताव पार्टी की बैठक में रखा गया तो उस समय कई वरिष्ठ नेताओं ने इसका यह कहकर विरोध किया कि मध्यप्रदेश में स्थितियां गुजरात से अलग है और यहां पर एक ही सीट पर कई वरिष्ठ दावेदार मौजूद हैं। ऐसे में यदि बगावत हो गई तो पार्टी के लिए और भी मुश्किल हो जाएगी। लेकिन यह माना जा रहा है कि लंबे समय से सरकार में बने हुए विधायकों की छुट्टी कर दी जाएगी और संभव है कि इन्हें संसदीय राजनीति का झुनझुना पकड़ा दिया जाएगा। 

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