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कोरोना के चलते चीन में भीषण बिजली संकट, अंधेरे में शहर

बहुमंजिला इमारतों में लिफ्ट बंद और स्ट्रीट लाईट भी

यीवू (पूर्वी चीन)

दुनिया में अपने ओद्यौगिकरण का डंका बजाने वाले चीन में बिजली की हाल ठीक नहीं हैं। पूर्वी चीन के यीवू शहर में बिजली संकट के हाल बन गए हैं और यहां पर स्थानीय प्रशासन ने कईं दिनों से स्ट्रीट लाइट बंद कर दी है। इतना ही नहीं फैक्ट्रियों को भी अंश कालिक ही चलाए जाने की अनुमति है। खास बात यह है कि यह इलाका ठंड से जूझ रहा है ऐसे में लोगों को अपने घरों में हीटर चलाने की सुविधा भी नहीं मिल पा रही है। बताया गया है कि बहुमंजिला इमारतों में लिफ्ट का उपयोग चौथी मंजिल से कम से लिए नहीं किया जा सकता है। इसके पीछे कोरोना को जिम्मेदार बताया जा रहा है।

बताया गया है कि इस हाल के पीछे कोयला संकट जिम्मेदार है। चीन में कुल बिजली का 70 प्रतिशत भाग जीवाश्म ईंधन (fossil fuel) यानी कोयले से होता है। फिलहाल कोयले की खदानों बाहर ट्रकों की लंबी लाइन लगी हैं। इस बीच यीवू के निवासियों के बीच डर का माहौल है। उन्हें लग रहा है कि बिजली की कमी के चलते इस भीषण ठंड में उन्हें बहुत मुश्किल पेश आएगी। उन्हें यह भी लगता है कि बिजली इस स्थिति के चलते उनके काम -धंधे भी चौपट हो सकते हैं।

लिफ्ट भी बंद

बिजली संकट का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बहुमंजिला इमारतों में लगी लिफ्ट्स को बंद कर दिया गया है। बहुत ऊंची बिल्डिंग्स में चौरथी मंजिल तक लिफ्ट का उपयोग नहीं किया जा सकता है। इसके चलते लोगों को सीढ़ियों से काम चलाना पड़ रहा है। वहीं स्थानीय अधिकारियों ने भीषण ठंड के बावजूद ऑफिसों में हीटर जलाने से मना किया है। इस हाल के बावजूद सरकार बिजली सकंट की स्थिति को स्वीकार नहीं कर रही है।

नेशनल डेवलेपमेंट एंड रिफॉर्म कमीशन के महासचिव झाओ शेंजिंग ने कहा है कि बिजली देने की हमारी क्षमता पर संदेह नहीं किया जाना चाहिए। हमारे पास बहुत बिजली है और हम हमारे महात्वाकांक्षी पर्यावरण लक्ष्य की दिशा में काम कर रहे हैं। बताया जाता है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग चीन को दुनिया में पर्यावरण के मामले में लीडर बनाना चाहत हैं और 2060 तक कार्बन उत्सर्जन शून्य पर लाना चाहते हैं।

ऑस्ट्रेलिया से बिगड़े संबंधों की कीमत

सरकार कुछ भी दावा करे लेकिन कहा जा रहा है कि चीन के नागरिकों को यह कीमत आस्ट्रेलिया के साथ चीन के बिगड़े संबंधों के कारण चुकाना पड़ रही है। चीन के तटीय क्षेत्रों में कोयले से चलने वाले बिजली घर ऑस्ट्रेलिया से आने वाले कोयले पर निर्भर करते हैं। लेकिन कोरोना के चलते दोनों देशों के संबंध बिगड़ चुके हैं। ऑस्ट्रेलिया कोरोना वायरस की उत्पत्ति की जांच की मांग करने वाले देशों में शामिल है। कोरोना वायरस सबसे चीन में पाया गया था।

ऑस्ट्रेलिया की इस मांग के बाद चीनी सरकार ने वहां से कोयला आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था। बहुत से जहाज इसके चलते बंदरगाह के बाहर खड़े रहे। हालांकि चीनी सरकार इस बात से इंकार करती है कि यह समस्या ऑस्ट्रेलिया से कोयला न मंगाए जाने के चलते हुई है। उसका कहना है कि देश में कुल कोयले के उपयोग में ऑस्ट्रेलिया के कोयले की हिस्सा केवल आठ प्रतिशत है। उसका कहना है कि इसमें भी बड़ी मात्रा में कोयला स्टील व अन्य धातुओं के उद्योग में उपयोग किया जाता है न कि बिजली बनाने में।

पहले ही चेता दिया था

वहीं चीन के कोयला खदानों वाले हुनान के अधिकारियों ने दिसंबर की शुरुआत में ही बिजली की कमी होने की संभावना जता दी थी। अधिकारियों ने कहा था कि दिसंबर के महीनें में बिजली उपभोग की दर में पिछले साल की तुलना में दहाई प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। इसकी चलते बिजली की कमी हो सकती है। चीन की सरकार अब कुछ क्षेत्रों में बिजली की कमी की बात स्वीकार कर रही है लेकिन इसके पीछे के कारण स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है।

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