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पृथ्वी के घूमने की गति बढ़ी दिन 24 घंटे से छोटा हुआ

पहली बार बढ़ी है पृथ्वी के घूमने की गति

गूंज न्यूज.

हम सभी जानते हैं कि समय बहुत तेजी से गुजर रहा है। हालांकि समय की जस्टिस जी की हम बात कर रहे हैं वह थोड़ी अलग है। पृथ्वी के अपने अक्ष पर घूमने के चलते दिन और रात होते हैं। अपने अक्ष पर पृथ्वी 24 घंटे में एक चक्कर पूरा लगाती है जिसे एक दिन कहा जाता है। हाल ही में पेरिस स्थित अनुसंधान केंद्र में पता चला है कि पृथ्वी के अपने अक्ष पर घूमने की गति बढ़ गई है जिसके चलते अब दिन 24 घंटे का नहीं बचा है।

हालांकि पृथ्वी के अपने अक्ष पर घूमने की गति में यह बदलाव पहली बार नहीं हुआ है लेकिन अब तक पृथ्वी कि अपने अक्ष पर घूमने की गति कम होती आई थी लेकिन यह पहला अवसर है जब पृथ्वी की अपने अक्ष पर घूमने की गति बढ़ी है। अब वैज्ञानिक इस बात पर विचार कर रहे हैं दिन के छोटे होने के चलते समय में होने वाले परिवर्तन को किस तरह से समायोजित किया जाए।

आपको याद होगा 2016 के नव वर्ष की रात्रि में दुनिया भर की घड़ियों में एक लीप सेकंड जोड़ा गया था, वह इसी तरह का समय समायोजन था। 

क्या हुआ है?

एटॉमिक क्लॉक पिछले 60 सालों से पृथ्वी के अपनी धुरी पर एक चक्कर लगाने में लगने वाले समय का हिसाब रखने का काम करती आई है। 1970 के बाद से अब तक 27 बार पृथ्वी के अपने अक्ष पर घूमने की गति में हुए परिवर्तन के चलते समय में लीप सेकंड जोड़े गए थे। यानी कि अब तक पृथ्वी के घूमने की गति कम होती थी जिसके चलते दिन 24 घंटे से थोड़ा बड़ा हो जाया करता था। लेकिन यह पहली बार है जब कि पृथ्वी के घूमने की गति तेज हुई है जिसके चलते दिन आधा मिली सेकंड छोटा हो गया है। पहली बार वैज्ञानिक इसके चलते नेगेटिव लीफ सेकंड घड़ी में घटाने पर विचार कर रहे हैं। 


क्या होगा आधे मिली सेकंड से

आधा मिली सेकंड देखने में एक बहुत छोटा समय है लेकिन जब 365 दिन वैसे प्रत्येक दिन आधा मिली सेकंड कम हो रहा हो तो यह समय वैज्ञानिक काल गणना के हिसाब से बहुत बड़ा समय हो जाता है। इसके चलते घड़ी में लीप सेकंड जोड़ने और घटाने की कवायद की जाती है। अब तक पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमने की सबसे तेज गति 19 जुलाई 2020 को थी जबकि पृथ्वी ने अपने अक्ष पर एक चक्कर पूरा लगाने में 1.14 मिली सेकंड कम समय लिया था। पिछले कुछ समय से वैज्ञानिक लगातार इस पर नजर रखे हुए हैं कि पृथ्वी को अपनी धुरी पर एक चक्कर पूरा लगाने में 86400 सेकेंड से कुछ समय कम लग रहा है। 

क्यों जरूरी है टाइम को एडजस्ट करन

पृथ्वी को एक चक्कर लगाने में जितना कम समय लग रहा है उसकी मां आप केवल एटॉमिक क्लॉक ही कर सकती है लेकिन फिर भी इसके दुनिया पर बहुत बड़े प्रभाव पड़ सकते हैं। खासकर सैटेलाइट और कम्युनिकेशन उपकरण के लिए सोलर टाइम के साथ में टाइम मैच करना बहुत जरूरी होता है जिसके बिना यह ठीक तरीके से काम नहीं कर सकते हैं। पेरिस स्थित इंटरनेशनल अर्थ रोटेशन सर्विस के कर्ता-धर्ता समय का हिसाब रखने की कोशिश में लगे हुए हैं और अब वे घड़ियों को एक सेकंड पीछे करने के बारे में विचार कर रहे हैं। 

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