पौधारोपण नाम पर हो रही पौधों की हत्या के लिए प्रस्तावित कानून, आप भी दे सकते हैं सुझाव

प्रस्तावित पौधारोपण अधिनियम, सरकार को भेजा जा रहा है ड्राफ्ट

पौधारोपण किया और पौधे मरे तो प्रति पौधा 5000 का जुर्माना

प्लांटेशन एक नौटंकी बन कर रह गया है इवेंट बड़ी जमकर होती है और जो कुछ सामने आता है वह होता है पौधों की हत्या। प्लांटेशन साइट पौधों के कब्रिस्तान की तरह लगते हैं। हर साल लाखों पौधे इसी तरह से मार दिए जाते हैं। वे केवल फोटो खिंचवाने और इवेंट के लिए लगाए जाते हैं। 

अतिथि बुलाए जाते हैं फोटो खिंचवाए जाते हैं, रिकॉर्ड बनाए जाते हैं। पीछे ढेर सारी डिस्पोजल,  प्लास्टिक की बोतल और कचरा पौधा लगाने वाले कथित पर्यावरण वादी छोड़ जाते हैं। इतना ही नहीं दर्जनों गाड़ियां कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ती हुई आती है और चली जाती हैं। इन इवेंट का लक्ष्य पौधे लगाकर उन्हें पेड़ बनाने का बिल्कुल नहीं होता है यह केवल फोटो खिंचवाते हैं और बाद में पौधों को भूख प्यासा मरने के लिए छोड़ जाते हैं। हर साल लाखों पौधों के साथ यही होता है। 

पौधारोपण की इवेंट की शिकार एक पौधा

क्या आपको ऐसा नहीं लगताकि इस तरह के पौधारोपण कार्यक्रमों पर प्रतिबंध होना चाहिए। पौधारोपण के लिए कानून बनना चाहिए जिसमें जब तक पौधारोपण का आयोजन करने वाले लोग पौधों के रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं करते तब तक उन्हें अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। इतना ही नहीं इसमें समुचित मात्रा में पौधों के पेड़ बनने की शर्त अनिवार्य रूप से लगाई जानी चाहिए। ऐसा न होने पर जमाने का प्रावधान हो, तभी पौधारोपण अपने सही और सार्थक रूप को पा सकेगा। इसके लिए हम सरकार को पौधारोपण अधिनियम का ड्राफ्ट भेजने की तैयारी कर रहे हैं। 

यदि आपको भी ऐसा लगता है तो आप इस ड्राफ्ट में अपने सुझाव दे सकते हैं। सुझाव youthmediamovement2012@gmail.com पर मेल कर सकते हैं। इसके पहले आप प्रस्तावित अधिनियम का ड्राफ्ट यहां पढ़ सकते हैं। 

पौधारोपण अभियान (विनियमन, रखरखाव एवं जवाबदेही) अधिनियम, 2026

(मॉडल ड्राफ्ट – विचार, चर्चा एवं विधायी प्रक्रिया हेतु)

मौजूदा कानून (वन संरक्षण अधिनियम 1980, CAMPA, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986) मुख्य रूप से वन भूमि हस्तांतरण या प्रतिपूरक वनरोपण पर केंद्रित हैं। सामान्य पौधारोपण अभियानों (CSR, सरकारी ड्राइव, स्कूल-कॉलेज, NGO, कॉर्पोरेट इवेंट) के लिए कोई अनिवार्य अनुमति, 3-वर्षीय रखरखाव योजना, उत्तरजीविता लक्ष्य और जवाबदेही नहीं है।

यह मॉडल ड्राफ्ट उसी कमी को भरने के लिए तैयार किया गया है। इसे राज्य विधानसभा (जैसे मध्य प्रदेश) या केंद्र सरकार (पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत नियम/नया अधिनियम) द्वारा अपनाया जा सकता है। संख्या (जुर्माना, उत्तरजीविता दर, पौधों की संख्या) सांकेतिक हैं, इन्हें विशेषज्ञों (वन विभाग, पर्यावरणविद्, कानूनी विशेषज्ञ) की राय से अंतिम रूप दिया जा सकता है।

प्रस्तावना

जबकि पौधारोपण के नाम पर बड़े पैमाने पर आयोजित इवेंट और अभियान में पौधों की उत्तरजीविता सुनिश्चित करने के लिए कोई कानूनी बाध्यता नहीं है, जिसके कारण अधिकांश पौधे रोपण के कुछ महीनों या वर्षों में मर जाते हैं;

जबकि इससे सार्वजनिक/निजी संसाधनों की भारी बर्बादी, पर्यावरणीय क्षति और “हरित प्रचार” का भ्रम पैदा होता है;

जबकि वैज्ञानिक अध्ययनों और सर्वोत्तम प्रथाओं (monsoon planting, native species, 2-3 वर्षीय देखभाल, geo-tagging, community ownership) से सिद्ध है कि उचित योजना और रखरखाव से 80-92% उत्तरजीविता प्राप्त की जा सकती है;

अतः अब यह आवश्यक है कि पौधारोपण अभियानों को विनियमित किया जाए, अनुमति अनिवार्य की जाए, रखरखाव की जिम्मेदारी तय की जाए और उल्लंघन पर दंड का प्रावधान किया जाए।

संक्षिप्त नाम , विस्तार और प्रारंभ

(1) यह अधिनियम पौधारोपण अभियान (विनियमन, रखरखाव एवं जवाबदेही) अधिनियम 2026 कहा जाएगा।

(2) यह सम्पूर्ण [राज्य का नाम] पर लागू होगा (या केंद्र शासित प्रदेशों पर)।

(3) यह राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से लागू होगा।

2. परिभाषाएँ

(a) “पौधारोपण अभियान” : कोई भी संगठित कार्यक्रम, इवेंट, ड्राइव, CSR गतिविधि या अभियान जिसमें 50 (पचास) या अधिक पौधे/सैपलिंग सार्वजनिक, सरकारी, सामुदायिक या निजी भूमि पर रोपित किए जाएँ, चाहे उसका उद्देश्य प्रचार, CSR, शैक्षिक या कोई अन्य हो।

(b) “आयोजक” : मुख्य रूप से जिम्मेदार व्यक्ति, संस्था, NGO, कंपनी, शासकीय विभाग या समूह।

(c) “प्रायोजक” : आर्थिक सहायता या संसाधन देने वाला व्यक्ति/संस्था।

(d) “मुख्य अतिथि / dignitary” : उद्घाटन, भागीदारी या समर्थन देने वाला कोई भी लोक सेवक, राजनेता, सेलिब्रिटी या गणमान्य व्यक्ति।

(e) “नामित प्राधिकारी” : जिला स्तर पर वन विभाग के अधिकारी (DFO या उनके नामित) और पर्यावरण विभाग के अधिकारी की संयुक्त समिति, या राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित प्राधिकारी।

(f) “उत्तरजीविता दर” : geo-tagged सत्यापन के आधार पर रोपण के ठीक 3 वर्ष बाद जीवित एवं स्वस्थ (न्यूनतम वृद्धि वाले) पौधों की प्रतिशतता।

(g) “रखरखाव योजना” : 3 वर्ष की विस्तृत योजना जिसमें सिंचाई, निराई-गुड़ाई, कीट नियंत्रण, चराई से सुरक्षा, tree guard, मृत पौधों का प्रतिस्थापन, बजट और जिम्मेदार व्यक्ति/संस्था का विवरण हो।

3. पौधारोपण अभियान की अनुमति अनिवार्य

(1) कोई भी पौधारोपण अभियान बिना पूर्व लिखित अनुमति के आयोजित नहीं किया जाएगा।

(2) अनुमति के लिए आवेदन रोपण की प्रस्तावित तारीख से कम से कम 30 दिन पहले नामित प्राधिकारी को करना होगा।

(3) आवेदन के साथ अनिवार्य दस्तावेज:

(i) भूमि का स्वामित्व/सहमति पत्र + geo-निर्देशांक

(ii) पौधों की संख्या, प्रजाति (देशी/स्थानीय अनुकूलित प्रजातियों को प्राथमिकता; आक्रामक प्रजातियाँ प्रतिबंधित)

(iii) विस्तृत रोपण विधि (गड्ढे का आकार, मिट्टी उपचार, mulching – अनुसूची-I में दिए मानक)

(iv) 3-वर्षीय रखरखाव एवं निगरानी योजना (बजट, जिम्मेदार व्यक्ति, सिंचाई कार्यक्रम, सुरक्षा उपाय)

(v) अपेक्षित उत्तरजीविता दर (न्यूनतम 80% 3 वर्ष बाद)

(vi) geo-tagging, फोटो/ड्रोन निगरानी एवं सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड की प्रतिबद्धता

(vii) फंडिंग स्रोत और रखरखाव के लिए escrow/बॉन्ड (बड़े अभियानों में)

(4) नामित प्राधिकारी स्थल निरीक्षण करेगा और 15 दिनों में अनुमति/अस्वीकृति देगा। अनुमति में शर्तें लगाई जा सकती हैं।

4. रखरखाव, निगरानी एवं उत्तरजीविता लक्ष्य

(1) आयोजक प्राथमिक रूप से 3 वर्ष तक पौधों के जीवित रहने और स्वस्थ वृद्धि के लिए जिम्मेदार होगा।

(2) न्यूनतम उत्तरजीविता लक्ष्य:

1 वर्ष के अंत में: 70%

2 वर्ष के अंत में: 75%

3 वर्ष के अंत में: 80% (स्वस्थ पौधे, न्यूनतम ऊँचाई/गिरह वृद्धि के साथ)

(3) मृत/कमजोर पौधों का gap filling (प्रतिस्थापन रोपण) आयोजक के खर्च पर अनिवार्य।

(4) वार्षिक उत्तरजीविता ऑडिट: नामित प्राधिकारी या स्वतंत्र तृतीय पक्ष (जैसे ICFRE, स्थानीय विश्वविद्यालय या पंजीकृत NGO) द्वारा। रिपोर्ट राज्य पोर्टल पर सार्वजनिक।

(5) सभी पौधे geo-tagged (GPS + समय-चिह्नित फोटो) होने चाहिए। बड़े अभियानों में ड्रोन/सैटेलाइट निगरानी अनिवार्य।

(6) रोपण का आदर्श समय मानसून (जून-सितंबर)। गैर-मानसून रोपण पर अतिरिक्त शर्तें/जांच।

5. दायित्व एवं दंड

(1) संयुक्त एवं व्यक्तिगत दायित्व: आयोजक, प्रायोजक और मुख्य अतिथि (जिन्होंने उद्घाटन/समर्थन किया) पर संयुक्त दायित्व।

(2) अपराध एवं दंड:

(a) बिना अनुमति अभियान आयोजित करने पर न्यूनतम ₹ एक लाख जुर्माना और इसके अलावा पौधों के उत्तरजीवी लक्ष्य के प्रावधान भी लागू होंगे।

(b) झूठी रिपोर्टिंग / geo-tagging में हेरफेर करने पर

₹2 लाख का जुर्माना + 1 वर्ष कारावास

(c) 3 वर्ष बाद उत्तरजीविता 80% से कम (gross negligence सिद्ध होने पर)

(i) प्रति मृत पौधे ₹1,000–5,000 जुर्माना + replanting cost + criminal negligence के तहत कारावास (यदि <60% survival और willful neglect)

(d) मुख्य अतिथि/dignitary द्वारा गैर-अनुपालित अभियान में भागीदारी/समर्थन करने पर ₹25,000 से ₹1 लाख जुर्माना + सार्वजनिक disclosure + Green Fund में योगदान (या समकक्ष वृक्ष गोद लेना)

(e) रखरखाव योजना का पालन न करने पर ब्लैकलिस्टिंग (भविष्य के अभियानों से वंचित) + धन वसूली (land revenue की तरह) + Green Plantation Fund में जमा

(3) Green Plantation Fund: दंड राशि से बना कोष – असफल स्थलों के रखरखाव या नए वैज्ञानिक रोपण के लिए उपयोग।

(4) अपराध संज्ञेय (cognizable) होंगे।

6. प्रोत्साहन

(a) 85%+ उत्तरजीविता और अच्छी वृद्धि वाले आयोजकों को “ग्रीन स्टार” प्रमाण-पत्र, पुरस्कार, CSR टैक्स लाभ में प्राथमिकता, सरकारी योजनाओं में प्राथमिकता।

(b) सामुदायिक/किसान-स्वामित्व मॉडल (जैसे farmer partnership) को विशेष प्रोत्साहन।

7. छूट

(a) 50 से कम पौधों के व्यक्तिगत/घरेलू रोपण (लेकिन प्रोत्साहित)।

(b) शुद्ध वैज्ञानिक अनुसंधान या वन विभाग के नियंत्रित compensatory afforestation (जिन पर पहले से CAF Act लागू) – लेकिन उनमें भी 3-वर्षीय रखरखाव और 75%+ उत्तरजीविता अनिवार्य (MP CAMPA निर्देशों के अनुरूप)।

8. नियम बनाने की शक्ति

राज्य सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों को पूरा करने के लिए नियम, अनुसूचियाँ और दिशा-निर्देश बना सकती है (तकनीकी मानक, आवेदन प्रारूप, ऑडिट प्रक्रिया, प्रजाति सूची आदि)।

अनुसूची-I (उदाहरण – विस्तार से नियमों में)

(i)        गड्ढे का न्यूनतम आकार: 60×60×60 सेमी (बड़े वृक्षों के लिए अधिक)।

(ii)       मिट्टी उपचार, mulching, tree guard अनिवार्य।

(iii)      देशी प्रजातियाँ (क्षेत्र अनुसार – नीम, पीपल, जामुन, आँवला, करंज, शीशम आदि; आक्रामक जैसे विलायती बबूल प्रतिबंधित)।

(iv)      उत्तरजीविता गणना विधि: Geo-tagged नमूना + पूर्ण गणना (छोटे अभियानों में)।

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