रिकॉर्ड के लिए सेल्फी के बिना महिलाओं को कचरा भी नहीं डालने दिया!

सेल्फी तो ठीक है, बस लीक न हो जाए?

नितेश पाल

इंदौर नगर निगम ने शहर को स्वच्छ बताने के नाम पर एक इनोवेशन बताया। ये इनोवेशन था, स्वच्छता कर्मियों के साथ शहरवासियों की सेल्फी का। पूरे शहर में सुबह कचरा लेने आने वालों के साथ सेल्फी ली गई। कहने को तो ये जनता का ही कदम था लेकिन जमीनी हकीकत कुछ ओर ही थी। कई जगह पर कचरागाड़ी वालों ने तब तक कचरा डालने नहीं दिया, जब तक की सेल्फी नहीं ली गई।

कई जगह पर खुद कचरा लेने वालों ने सेल्फी ली और कई जगह पर सेल्फी लेने के बाद अपने मोबाइल पर ट्रांसफर करवाया। इंदौर में अधिकांश घरों में सुबह कचरा देने के लिए महिलाएं ही जाती हैं। जब कचरा लेने वालों ने कचरा लेने से ही इंकार कर दिया तो उनको भी मजबूरी में सेल्फी लेना पड़ी। मुझे सेल्फी से कोई दिक्कत नहीं है, मेरी शंका है सेल्फी के इन फोटो का किसी तरह का दुरुपयोग न हो जाए..।

देश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कुछ समय पहले कहा था कि मतदान केंद्रों के सीसीटीवी फुटेज बाहर आने से महिलाओं की निजता को खतरा हो सकता है। क्या किसी बहन-बेटी के फोटो सार्वजनिक करना सही होगा। मैं उनकी बात से पूरी तरह से इतेफाक रखता हूं, क्योंकि एआई के जमाने में खतरा बढ़ गया है। पांच दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सेल्फी मोड के वीडियो को एआई से बदलकर उसके मीम बनाए गए और ये मीम पूरे देश में सोशल मीडिया के प्लेटफार्म पर मौजूद हैं।

ऐसे में कचरा देने वाली महिलाओं के फोटो के साथ कोई छेडछाड़ नहीं होगी, कोई उसका गलत उपयोग नहीं करेगा, कोई महिला के फोटो का गलत इस्तेमाल करता है तो उसके लिए कौन जिम्मेदार होगा? ये भी साफ होना चाहिए। जब बात इंदौर नगर निगम की होती है तो डर और बढ़ जाता है क्योंकि भागीरथपुरा में गंदे पानी से 36 मौतों के लिए कौन जिम्मेदार है ये 6 माह बाद भी नहीं तय हो पाया है।

नगर निगम जिसकी वेबसाइट बार-बार हैक हो जाती है, उसका डाटा उड़ जाता है। नगर निगम अपनी वेबसाइट को ही सेफ नहीं कर पाता है, उस नगर निगम से महिलाओं के फोटो सुरक्षित रखने की उम्मीद लगाना भी एक डर पैदा करता है। नगर निगम ने ये भी साफ नहीं किया है कि वो इन लाखों फोटो को कहां स्टोर करेगा और वो सर्वर हैक नहीं होगा, उसकी क्या सुरक्षा है, वो भी साफ नहीं किया गया है।

डर इस बात का भी है कि यदि किसी महिला के फोटो के साथ एआई से छेडछाड़ कर उसके चरित्रहनन की कोशिश की जाती है तो उस निर्दोष महिला को बचाने कौन खड़ा होगा?

जेन-जी आंदोलन के समय ये भी हम देख चुके हैं कि केवल चेहरे से ही न सिर्फ पुलिस बल्कि बच्चों ने भी शादी वर्दी में लट्ठ चलाने वालों के घर के पते सहित पूरी जानकारी निकाल ली थी। ऐसे में महिलाओं के फोटो मिलने के बाद उनकी निजता सुरक्षित रहेगी ये एक बड़ा डर है।

मैं शहर के सभी ओहदेदारों से केवल एक ही निवेदन करता हूं, किसी महिला के साथ कोई अभद्रता न होने देना..।

बाकलम – नितेश पाल

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