CJI सूर्यकांत की उपस्थिति को लेकर विवादित हुआ NALSAR का कन्वोकेशन रद्द
NLSUI स्टूडेंट ने चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया को बुलाने के लिए सार्वजनिक स्टेटमेंट जारी करने से मना किया तो यूनिवर्सिटी ने कन्वोकेशन रद्द किया
नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSUI) का, वो कन्वोकेशन जिसमें जस्टिस सूर्यकांत को बुलाने का विरोध किया गया थाअब रद्द कर दिया गया है। छात्रों ने इस मामले में जो जानकारी शेयर की है उसके मुताबिक उनसे कहा गया था कि वह चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत को आमंत्रित करने के लिए एक सार्वजनिक बयान जारी करें, छात्रों के इनकार के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अब कन्वोकेशन सेरिमनी को रद्द करने का निर्णय लिया है।
यह कन्वोकेशन उस समय चर्चा में आ गया था जब यूनिवर्सिटी के छात्रों ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को चीफ गेस्ट के रूप में बुलाने का विरोध किया था। इस कार्यक्रम में चीफ जस्टिस के साथ ही बार काउंसिल आफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा भी मौजूद रहने वाले थे। हालांकि बार काउंसिल आफ इंडिया द्वारा यूनिवर्सिटी के छात्रों को पंजीकरण न देने के अस्थाई आदेश के बाद यह तय हो गया था कि मनन कुमार मिश्रा इस आयोजन में शामिल नहीं होंगे।
एनएलएसआईयू ने गुरुवार को एक नोटिस जारी कर घोषणा की थी कि “अपरिहार्य परिस्थितियों” के कारण 2026 बैच के लिए कोई दीक्षांत समारोह आयोजित नहीं किया जाएगा और छात्रों को उनकी डिग्री अनुपस्थिति में प्रदान की जाएगी।
छात्रों ने यह कारण बताएं
पासआउट होने वाले छात्रों ने जो टाइमलाइन शेयर की, उसके हिसाब से 3 अगस्त को उन्हें कॉन्वोकेशन का निमंत्रण मिला था जो 12 सितंबर को होना था। छात्रों ने इसके लिए टिकट और रहने का इंतजाम भी कर लिया था।
15 अगस्त को एनएलएसआईयू के 700 से ज्यादा लोगों ने एक बयान पर साइन किए जिसमें बीसीआई चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा और चीफ जस्टिस सूर्य कांत के कॉन्वोकेशन में आने का विरोध किया गया।
यह बयान उस घटना के बाद आया जब 13 अगस्त को बीसीआई ने नालसर के छात्रों का एनरोलमेंट रोक दिया था और कुछ घंटों में ही वापस चालू कर दिया, क्योंकि उन्होंने अपने कॉन्वोकेशन में चीफ जस्टिस के आने का विरोध किया था।
17 अगस्त को एनएलएसआईयू के छात्रों को बताया गया कि चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जो यूनिवर्सिटी के चांसलर हैं, छात्रों से मिलकर उनकी बात समझना चाहते हैं। उसके बाद जल्दी ही मीटिंग हो गई।
मीटिंग के बाद छात्रों से वोट करने को कहा गया कि क्या वो चीफ जस्टिस की मौजूदगी में बिना किसी विरोध या हंगामे के कॉन्वोकेशन में आएंगे। चीफ जस्टिस के बिना समारोह करने या समारोह में अपनी बात कहने का कोई ऑप्शन वोटिंग के लिए नहीं दिया गया।
छात्रों को यह भी भरोसा दिलाया गया कि बीसीआई चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा समारोह में नहीं आएंगे।
23 अगस्त को हुए वोट में ज्यादातर छात्रों ने हां कर दी, क्योंकि दूसरा ऑप्शन था कि कॉन्वोकेशन ही कैंसिल हो जाएगा। लेकिन दो दिन बाद बात बदल गई। 25 अगस्त को छात्रों से कहा गया कि उन्हें चीफ जस्टिस को पब्लिकली इनवाइट करने वाला एक स्टेटमेंट भी देना होगा और यह भी बताया गया कि कॉन्वोकेशन तभी होगा जब सभी छात्र इस स्टेटमेंट पर एकमत होंगे।
छात्रों ने कहा, “पिछली किसी भी चर्चा में सार्वजनिक बयान का उल्लेख नहीं था, और न ही इसे एक पूर्व शर्त के रूप में रखा गया था। इसलिए संस्थान द्वारा संचालित चारों ग्रेजुएट प्रोग्राम के छात्रों के बीच इस पर नए सिरे से चर्चा करना आवश्यक था।”
अगले दो दिनों तक छात्रों ने इस मांग पर विचार-विमर्श किया। बीए, एलएलबी (ऑनर्स) कार्यक्रम के छात्रों ने इस तरह का सार्वजनिक निमंत्रण जारी करने के खिलाफ मतदान किया। उन्होंने अचानक इस तरह का अनुरोध करने तथा BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा की अनुपस्थिति का उल्लेख न कर पाने की पाबंदी के साथ ही इस तथ्य का हवाला भी दिया कि बयान जारी करने से पहले उसकी जांच की जाएगी।
इस तरह से यह तय हो गया है कि इस बार अब कन्वोकेशन नहीं होगा ।