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पैसों के दम पर अन्य खेलों के टैलेंट को अपनी ओर खींच रहा क्रिकेट

सुप्रीम कोर्ट में जनहिच याचिका, इस संबंध में नीति बनाने के लिए सरकार को निर्देश देने की मांग, कोर्ट ने किया इंकार

नई दिल्ली

ओलंपिक्स और पैरालंपिक में भारत के प्रदर्शन के बाद देश में खेलमय वातावरण बनने लगा है इसका प्रभाव यह हुआ है कि सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई जिसमें मांग की गई कि देश के प्रतिभाशाली युवा क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों को अपनाएं इस संबंध में नीति बनाने के लिए केंद्र सरकार से कहा जाए। सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ ने इस जनहित याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि न्यायालय इस तरह के निर्देश नहीं दे सकता। हालांकि कोर्ट ने माना कि अन्य खेलों को प्रोत्साहन की आवश्यकता है।

यह याचिका विशाल तिवारी की ओर से दाखिल की गई थी।बु धवार को सुप्रीम कोर्ट में केस की सुनवाई तीन जजों की पीठ ने की जिसमें जस्टिस यूयू ललित, एसआर भाट और बेला एम त्रिवेदी ने सुनवाई के दौरान मीराबाई चानू और मेरी काॅम का उल्लेख करते हुए कहा कि इन खिलाड़ियों की सफलता और योगदान क्रिकेट क्रेजी देश में युवाओं को अन्य खेलों को अपनाने की प्रेरणा देते हैं।

 बेंच ने याचिकाकर्ता से यह भी पूछा कि वह कौन सा खेल खेलते हैं इस पर तिवारी ने जवाब दिया कि मैं थोड़ी सी जिमिंग और कुछ व्यायाम करता हूं। इस पर 3 जजों की बेंच ने कहा की देश में आप जैसे लाखों लोग हैं, यदि हर कोई स्पोर्ट्स पॉलिसी बदलने की मांग करने लगे तो यह बहुत कठिन होगा। कोर्ट ने कहा कि यह उसका अधिकार क्षेत्र नहीं है कि वह सरकार को खेल नीति बनाने के लिए निर्देश दे।

क्रिकेट खा रहा है देश का टैलेंट

याचिका में विशाल तिवारी ने कहा कि क्रिकेट में बहुत पैसा है इसके चलते यह देश की उन खेल प्रतिभाओं को अपनी और आकर्षित करता है, जो कि अन्य खेलों में जा सकते थे। याचिका में कहा गया है कि हम 100 करोड़ से ज्यादा लोग हैं लेकिन फिर भी ओलंपिक और विश्व खेल प्रतियोगिताओं में हमारा प्रदर्शन पिछले कई दशकों से बहुत बुरा रहा है। इसके बावजूद सरकार खेलों के लिए उपयुक्त वातावरण बनाने और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए ध्यान नहीं दे रही है। स्कूल और कॉलेज का करिकुलम इस प्रकार तैयार किया जाना चाहिए कि वह युवाओं को क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करें। 

अन्य खेलों को है प्रोत्साहन की आवश्ययकता

सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने कहा कि हमारे पास मीराबाई और मेरी कॉम हैं जिन्होंने हर कठिनाई को पार पाकर विश्व स्तर पर अपनी चमक बिखेरी है और देश के लिए ख्याति अर्जित की है। कोर्ट ने कहा कि हम भी यह महसूस करते हैं कि क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों को सरकार और निजी क्षेत्र से प्रोत्साहन की जरूरत है लेकिन हम यह निर्देश नहीं दे सकते।

 इसके बाद तिवारी ने कोर्ट से अनुरोध किया कि वह अपनी जनहित याचिका को सरकार को एक ज्ञापन के रूप में सौंपना चाहते हैं लेकिन कोर्ट ने उन्हें ऐसा करने की अनुमति नहीं थी लेकिन उन्हें जनहित याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी। 

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