सड़क का कुत्ता दुनिया का सबसे उपेक्षित जानवर है। हाल यह है कि देश की अधिकांश नगर निगम कुत्तों के आतंक के नाम पर सरकारी तौर पर इन्हें मारने का अभियान चलाती हैं।कई स्थानों पर या अभियान घोषित है तो कईं स्थानों पर अघोषित। 

अभी सोशल मीडिया पर स्वदेशी के सबसे बड़े समर्थक रहे राजीव दीक्षित का एक वीडियो वायरल हो रहा है।  राजीव दीक्षित आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग ग्रैजुएट थे और स्वदेशी के सबसे बड़े समर्थक।

उन्होंने विभिन्न रोगों की भारतीय पद्धति से चिकित्सा के मामले में अनेक व्याख्यान दिए हैं। उनके वीडियो आज भी लाखों की संख्या में देखे जाते हैं। उन्हीं का एक वीडियो स्ट्रीट डॉग्स के बारे में है। जिसमें उन्होंने बताया है कि किस तरह जो काम सेटेलाइट नहीं कर पाई वह काम स्ट्रीट डॉग ने किये। इस वीडियो को अब तक 15 लाख बार देखा जा चुका है। इस वीडियो में राजीव दीक्षित ने कुत्तों की नसबंदी किए जाने को भी गलत बताया है। 


 मूर्खों को मालूम नहीं है स्ट्रीट डॉग की उपयोगिता


इस वीडियो की शुरुआत में राजीव दीक्षित कहते हैं कि कहीं से कुतर्क आ जाएगा और कहने लगेंगे कि कुत्तों को मारो।  कई  म्यूनिसिपल कारपोरेशन ने तो अभियान ही चला रखा है कि स्ट्रीट डॉग्स को मारो। इन मूर्खों को पता नहीं है कि स्ट्रीट डॉग मनुष्य के लिए कितने उपयोगी हैं? इस वीडियो में राजीव दीक्षित आगे कहते हैं कि इंसान को कुत्तों की जरूरत कितनी है यह जॉर्ज बुश से पूछो। राजीव दीक्षित यह बताते हैं कि जॉर्ज बुश ने अपनी सुरक्षा के लिए 50 से अधिक कुत्ते तैनात किए थे और जब वे भारत आए थे तो इन कुत्तों के लिए अलग से एक होटल बुक किया गया था। 


जब सेटेलाइट फेल हो गए


वीडियो में आगे राजीव दीक्षित ने उस घटना का उल्लेख किया है जब करोड़ों रुपए की लागत के सेटेलाइट फेल हो गए थे और स्ट्रीट डॉग इंसान के मददगार साबित हुए थे। राजीव दीक्षित ने सुनामी आपदा का जिक्र करते हुए बताया कि वह अपने मित्रों के साथ सुनामी से पीड़ित लोगों की सहायता के लिए अंडमान गए थे। 

राजीव दीक्षित ने कि मैंने उस दौरान अंडमान के कई गांव का दौरा किया और हर गांव में मैं पूछता था कि कितने मनुष्य मरे? तो जवाब मिलता था कि कहीं 50 मरे, कहीं सौ मरे और कहीं तो इनकी संख्या डेढ़ हजार तक थी। तब मैंने दूसरा प्रश्न पूछा कि जानवर कितने मरे तो उन्होंने जवाब दिया एक भी नहीं। 


 वीडियो में राजीव दीक्षित कहते हैं कि इस मामले में मेरी बात बंबूफ्लेट नाम के एक गांव के सरपंच से हुई।  यह गांव अंडमान की राजधानी पोर्ट ब्लेयर से 60 नॉटिकल माइल्स की दूरी पर है। जब मैंने इस गांव के सरपंच से एक भी जानवर के ना मरने के पीछे कारण पूछा तो उसने जवाब दिया आपको पता है इंसान तो महामूर्ख होता है। 

उसने आगे बताया कि जब सुनामी आया तो उसके 2 दिन पहले मेरे कुत्ते को मालूम था कि सुनामी आने वाला है। यहां तक कि मेरी गाय, भैंस, बिल्ली और चूहे तक को पता था कि सुनामी आने वाला है लेकिन हम मनुष्य को नहीं मालूम था। 


सरपंच ने बताया कि जब मुझे अपने घर के आस-पास एक भी जानवर नहीं दिखा तो मुझे ऐसा लगा कि जरूर कुछ होने वाला है। इसके चलते मैं भी घर छोड़ कर चला गया और सुनामी से बच गया। सरपंच ने आप कहीं भी जाना यह जरूर बताना कि सुनामी में एक भी जानवर नहीं मरा लेकिन इंसान 36000 मरे हैं।  इसका मतलब कि मनुष्य की अकल कम है और जानवर ज्यादा समझदार हैं। 


सैकड़ों करोड़ के सेटेलाइट बेकार हो गए


राजीव दीक्षित ने कहा कि मैंने सरपंच से पूछा कि भारत सरकार ने बहुत सारे सेटेलाइट छोड़े हैं जो की मौसम की निगरानी करते हैं। इनमें से कुछ तो केवल समुद्र की निगरानी के लिए ही हैं। इन पर भारत सरकार प्रतिवर्ष सैकड़ों रुपया खर्च करती है। जो बात यह सेटेलाइट पता नहीं कर सके वह जानवरों को कैसे पता चली? 


 सबसे पहले कुत्ते को पता चलता है


सरपंच ने बताया जानवरों को भगवान का कोई वरदान है या उनके पास एक सिक्स्थ सेंस होता है। जो उन्हें होने वाली घटनाओं का पता चल जाता है और जानवरों में भी सबसे पहले कुत्ते को पता चलता है। और हमारी नगर पालिका के मूर्ख अधिकारी इन्हीं कुत्तों को मारने में लगे हुए हैं।  राजीव दीक्षित इस वीडियो में कहते हैं कि कल्पना कीजिए कि सारे कुत्ते खत्म हो गए तो अगली बार सुनामी आएगा तो बताने वाला कोई नहीं होगा। 

इस वीडियों को आप यहां देख सकते हैं।

4 thought on “बेकार नहीं हैं सड़क के कुत्ते, जहां करोड़ों रुपए की सैटेलाइट फेल हुई वहां पास हुए स्ट्रीट डॉग”

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