19th May 2022

रामपुर से आज तक हिंदू नहीं जीता और मोहम्मदी से मुसलमान

यूपी चुनाव की अजब कहानी

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 जोरों पर हैं। पहले चरण का मतदान करीब आ रहा है और अब तक यह तय नहीं है कि इस बार वोट जाति पर पड़ेगा या फिर कामकाज भी देखा जाएगा। खास बात यह है कि अयोध्या में रामलला के मंदिर के भूमि पूजन के पश्चात के पहला चुनाव है और अयोध्या पिछले चार दशकों से यूपी चुनाव में एक महत्वपूर्ण फैक्टर रहा है। यूपी चुनाव में एक खास बात और सामने आई है कि भगवान राम के नाम पर बसे रामपुर विधानसभा से आज तक कोई हिंदू उम्मीदवार नहीं जीता तो वही मोहम्मद के नाम से बने मोहम्मदी विधानसभा में किसी मुस्लिम को जीत नसीब नहीं हुई है।

इसके अलावा एक और रामपुर है रामपुर खास जो कि भाजपा की बजाए कॉन्ग्रेस का गढ़ है इसलिए 10 बार से लगातार वहां से कॉन्ग्रेस के प्रमोद तिवारी का कब्ज़ा है।

 पिछले दो दशक से रामपुर विधानसभा सीट समाजवादी पार्टी के बड़बोले नेता आजम खान का गढ़ रही है। वे इस बार भी यही से चुनाव लड़ेंगे। अभी वो जेल में हैं और माना जा रहा है कि वह इस बार जेल से ही चुनाव लड़ेंगे। वे यहां से 7 बार विधायक रह चुके हैं लेकिन वे अजेय नहीं है। 1977 और 1996 में कांग्रेस प्रत्याशी ने उन्हें हराया था।

इस बार भाजपा ने यहां से पूर्व मंत्री शिव बहादुर सक्सेना के बेटे आकाश सक्सेना को टिकट दिया है। शिव बहादुर सक्सेना बगल की स्वार सीट से चार बार विधायक रहे हैं। आकाश के बारे में खास बात यह है कि आज आजम खान जेल में है तो उसके पीछे आकाश ही हैं। वे वकील हैं और आज़म और उनके परिवार के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। हालांकि आकाश की जीत इस बात पर निर्भर करेगी कि बसपा कांग्रेस और ओवैसी की मुस्लिम प्रत्याशी यहां से कितने वोट काटते हैं।

नाम मोहम्मदी लेकिन नहीं जीता कोई मुसलमान

इसी तरह से लखीमपुर जिले की विधानसभा सीट मोहम्मदी का नाम सुनकर ऐसा लगता है कि यह मुस्लिम प्रत्याशियों का गढ़ होगा लेकिन इसके उलट यहां पर हुए 16 चुनावों में 9 बार जनसंघ या भाजपा के प्रत्याशी ने जीत दर्ज की है। फिलहाल यहां से भाजपा के लोकेंद्र सिंह विधायक हैं। यहां से चार बार जनसंघ के मन्नालाल जीते हैं तो 4 बार ही बंशीधर राज जीते हैं लेकिन उन्होंने अलग-अलग पार्टियों से यह जीत दर्ज की है वे तीन बार कांग्रेस से और एक बार समाजवादी पार्टी से विधायक रहे हैं। 

हालांकि यूपी में ऐसी कई सीट है जहां से कभी मुस्लिम प्रत्याशी नहीं जीते हैं। लेकिन नाम से मुस्लिम बहुल सीट लगने वाली मोहम्मदी इस तरह की अकेली सीट है। 

रामपुर खास में भी अब तक भाजपा नहीं जीती

इसी तरह से भगवान राम के नाम पर प्रतापगढ़ जिले में रामपुर खास सीट है। इस चीज की खास बात यह है कि भले ही दो दशक पहले कांग्रेस के पैर यूपी से उखड़ गए हो लेकिन इस सीट पर पिछले 10 चुनाव से उसी का दबदबा है। 1980 में कांग्रेस के प्रमोद तिवारी पहली बार इस सीट पर जीते थे उसके बाद से 2012 तक लगातार नौ बार में यहां से विधायक रहे।

2014 में कांग्रेस ने उन्हें राज्यसभा भेज दिया था इसके चलते उन्होंने यहां से त्यागपत्र दे दिया। 2014 में हुए उपचुनाव में उनकी बेटी आराधना मिश्रा ने जीत दर्ज की। 2017 में भाजपा की लहर में भी आराधना मिश्रा ही यहां से जीतीं। 1996 में  तो प्रमोद तिवारी 1.16 लाख वोटों से जीते थे। 2012 के चुनाव में तो यहां भाजपा की जमानत जप्त हो गई थी।   

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