30th May 2024

अब तक वैक्सीन लगवाने के बाद भारत में 180 लोगों की जान गई

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ये डाटा AEFI committee ने जारी किया है जो कि 29 मार्च तक का है

नई दिल्ली.

29 मार्च तक भारत में लगभग साढ़े नौ करोड़ (95.43 मिलीयन) लोगों को कोविड का वैक्सीन दिया जा चुका है। Adverse Events Following Immunisation (AEFI) committee को दिए गए प्रेजेंटेशन में बताया गया है कि वैक्सीन लेने के बाद 180 लोगों की मौत हुई है। हालांकि इन सभी मौतों के पीछे वैक्सीनेशन कारण नहीं है।

AEFI यानी की वेक्सीन के बाद होने वाले प्रतिकूल असर का अध्ययन करने वाली कमेटी। इस कमेटी को विश्व स्वास्थ्य संगठन लगभग हर नई दवा और वैक्सीन के लिए बनाता है। हम जिन आंकड़ों की बात रहे हैं वो भारत में बनी कमेटी के हैं।

इस कमेटी से जुड़े एक अधिकारी ने बताया ने कि इस मामले में कुल बीस हजार वैक्सीन लेने वाले लोगों का अध्ययन किया गया। इनमें से 97 प्रतिशत लोगों में बहुत हल्के सा AEFI देखा गया। वहीं 617 लोगों पर इसका ज्यादा असर देखा गया और इनमें से 276 को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

तीन दिन के भीतर हुई अधिकांश मौत

वैक्सीन के बाद मरने वाले के डाटा का अध्ययन करने पर ये बात सामने आई कि कुल 180 में 124 की मौतों का आगे और अध्ययन करने पर पता चला कि वैक्सीन के बाद ज्यादातर मौत तीन दिन के भीतर हो गई थी। इसे आप यहां देख सकते हैं।

source India Express

तो क्या वैक्सीन सुरक्षित नहीं है?

इन आंकड़ों के आधार पर ये नहीं कहा जा सकता है कि वैक्सीन सुरक्षित नहीं है, क्योंकि ये मौत वैक्सीन के बाद हुुई हैं लेकिन इन मौतों के पीछे वैक्सीन को कारण नहीं माना जा सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने AEFI कमेटी इसलिए ही बनाई है। इस कमेटी ने अपनी जांच मे पहले कईं वैक्सीनों और दवाओं को मानव के लिए सुरक्षित नहीं पाया था लेकिन अब तक कोरोना वैक्सीन के मामले में ऐसा नहीं पाया गया है। भारत सरकार ने भी हमारे यहां लगाए जा रहे वैक्सीन कोवेक्सीन और कोविशील्ड को सुरक्षित बताया है।

तो फिर मौत कैसे हुई?

इस मामले AEFI कमेटी का अध्ययन जारी है कि क्या इन 180 मौतों का वैक्सीन से कोई संबंध है? इस मामले में कमेटी को अब तक जिन 617 मामलों की जानकारी मिली थी, उनमें से लगभग तीन सौ मामलों में मृतकों के सारे दस्तावेज मिल चुके हैं और कमेटी इनका अध्ययन कर रही है। कमेटी इन मृतकों के पुराने मेडिकल रिकॉर्ड, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, ऑटोप्सी, मेडिकल रिपोर्ट आदि का अध्ययन करेगी। इसके बाद इस बारे में सही स्थिति का पता चलेगा।

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