5th December 2022

विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानना रेमडेसिवीर कोरोना के ईलाज में कारगर नहीं

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के शोध की रिपोर्ट गंभीर रूप से पीड़ित मरीज को इससे फायदा नहीं

नोट: ये खबर WHO शोध पर आधारित है शोध की लिंक खबर मे दी गई है।

रेमडेसिवीर को लेकर मारामारी हो रही है। यहां तक कि देश के कई शहरों में इसके लिए लंबी लंंबी कतारें देखी गई हैं। यहां तक कि इसकी कालाबाजारी की शिकायतें भी हैं। इंदौर में लगी भीड़ को तो पूरे देश ने देखा है।

कोविड के ईलाज के लिए रेमडेसिवीर के उपयोग को लेकर WHO ने एक शोध कराया था । वैसे इस शोध में रेमडेसिवीर के साथ ही कोरोना के ईलाज में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन, लॉपीनेविर और इंटरफेरॉन को भी शामिल किया गया था। इन दवाओं का उपयोग दुनिया में कोरोना के ईलाज के लिए किया जा रहा है। इन दवाओं में से रेमडेसिवीर का उपोयग कोरोना के ईलाज में सबसे पहले किया गया था।

सॉलिडेरिटी ट्रायल

डब्ल्यूएचओ ने सॉलिडैरिटी ट्रॉयल Solidarity trial के दौरान 30 अलग-अलग देशों के 500 अस्पतालों में 11,266 व्यस्क मरीजों के ईलाज में चार दवाओं का परीक्षण किया गया था। इसमें इसी तरह की एक और सस्ते स्टेराइड डेक्सामेथासोन को इस अध्ययन में शामिल नहीं किया गया था। इस शोध के प्रारंभिक परिणाम उत्साहजनक नहीं थे। शोध में पाया गया है कि ये दवाएं मरीजों की जान बचाने और संक्रमण के दिनों को कम करने में भी कारगर साबित नहीं हुई हैं। हालांकि, इन नतीज़ों की अभी समीक्षा किया जाना बाकी है।

इस अध्ययन में जिन मरीजों को शामिल किया गया है उनमें

  • 2,750 को रेमडेसिवीर दिया गया था
  • 954 को हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन दी गई थी।
  • 1,411 को लापीनेवीर
  • 651 को इंटरफेरोना और लापीनेवीर दिया गया थी
  • 1,412 को इंटरफेरान दी गई
  • 4,088 को कोई दवा नहीं दी गई।

department of inflammation and immunity at Cleveland Clinic’s Lerner Research Institute के प्रमुख डॉ. थार स्टेपनबेक के अनुसार इसके पहले के रिसर्च जो कि कंपनियों की ओर कराए गए थे, उनमें इन दवाओं के कोविड के ईलाज में प्रभावी होने की बात कही गई थी लेकिन ये सभी अध्ययन छोटे सैंपल के आधार पर किए गए थे।

डॉ. स्टेपनबेक का कहना है कि इस शोध से पता चला है कि इन दवाओं में से कोई भी कोरोना के हॉस्पिटलाईज्ड मरीजों को लाभ नहीं पहुंचाती।

तो फिर क्या ?

डॉ. स्टेपनबेक का कहना है कि कोवि़ड के मरीजों को डेक्सामेथासॉन दी जा रही है। इसके परिणाम अच्छे हैं। इस मामले में WHO ने भी सहमति दी है। आप इसे यहां पढ़ सकते हैं। WHO का मानना है कि इस दवा को गंभीर रूप से कोरोना से पीड़ित मरीजों को दिया जाना चाहिए। इसे कोरोना से कम पीड़ित मरीज को नहीं दिया जाए। डॉ. स्टेपनबेक ने रेमडिस्वीर की तुलना में प्लाज्म थेरेपी को ज्यादा प्रभावी माना है।

इस शोध के आधार पर कहा जा रहा है कि रेमडेसिवीर , हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन, लॉपीनेविर और इंटरफेरॉन कोरोना की शुरुआती स्टेज पर ईलाज में प्रभावी हैं।

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