अब फेसबुक आप से पूछेगा, क्या आपका कोई दोस्त आतंकवादी बन रहा है?

आतंकी गतिविधियों में सोशल नेटवर्किंग साइट्स के सीधे इस्तेमाल के मामले तो कम आए हैं लेकिन आंतकी गतिविधियों में शामिल कईं लोगों के सोशल मीडिया अकाउंट से बाद में पता चलता है कि आतंकी गतिविधियों में लिप्त व्यक्ति पहले से ही अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर पहले से ही ऐसी सामग्री पोस्ट कर रहा था जिससे कि अंदाजा लगता है कि वो अतिवाद का शिकार था।

अबदुनिया की सबसे बड़ी सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक ने इस बात का पता लगाने के लिए नई पहल की है। इसमें फेसबुक समय समय पर यूजर्स से नोटिफिकेशन के माध्यम से पूछेगा कि क्या आपका कोई फेसबुक फ्रेंड आतंकवादी बन रहा है? इस तरह से फेसबुक यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उसके प्लैटफॉर्म का इस्तेमाल आतंकवादी या उग्रवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए नहीं होना चाहिए।

दुनिया में लगातार इस बात का दबाव रहा है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल अतिवादी सामग्री के प्रसार के लिए ना हो।

इस तरह के नोटिफिकेशन आएंगे

फेसबुक की ओर से कहा गया है कि यूजर्स को बताया जाएगा कि उनकी फेसबुक वॉल पर ऐसी सामग्री हो सकती है, जो उग्रवाद से संबंधित हो। ट्विटर पर फेसबुक के कुछ नोटिफिकेशन की तस्वीरें पोस्ट की गई हैं, जिनमें फेसबुक ने अपने यूजर्स से ऐसे सवाल पूछे गए हैं – क्या आप इस बात को लेकर चिंतित हैं कि आपका कोई जानकार उग्रवादी हो रहा है?

एक नोटिफिकेशन में यूजर्स को बताया गया है कि संभवतया उन्होंने अतिवादी सामग्री देखी है। दोनों ही जगहों पर यूजर्स को मदद लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।

ट्रम्प समर्थकों की हिंसा के बाद हुई शुरुआत

अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के बाद 6 जनवरी को कैपिटोल हिल पर तत्कालीन राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के समर्थकों की चढ़ाई के बाद अमेरिका में फेसबुक पर अतिवादियों को मंच देने के खिलाफ आवाजें उठीं थीं। फेसबुक का कहना है कि अभी वह परीक्षण कर रहा है, जिसके तहत इस तरह की चेतावनियों को केवल अमेरिका में ही भेजा गया है। बाद में इसे दुनियाभर के यूजर्स के लिए शुरू किया जा सकता है।

फेसबुक ने कहा, “यह परीक्षण हमारे उन वृहद प्रयासों का हिस्सा है, जिनके तहत हम फेसबुक इस्तेमाल करने वाले लोगों को उग्रवादी सामग्री का सामना होने पर मदद करने के तरीके खोज रहे हैं. हम स्वयंसेवी संस्थाओं और विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम कर रहे है और उम्मीद करते हैं कि भविष्य में हमारे पास बताने के लिए और बहुत कुछ होगा. ”

क्राइस्टचर्च हमले का फेसबुक लाइव किया था

फेसबुक ने कहा कि उसकी ये कोशिशें ‘क्राइस्टचर्च कॉल टु एक्शन’ मुहिम का हिस्सा हैं. न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में 2019 में एक बंदूकधारी ने स्थानीय मस्जिद पर हमला किया और गोलियां दाग कर दर्जनों जानें ले ली थीं। उस हमले का फेसबुक पर सीधा प्रसारण हुआ था। जिसके बाद तकनीकी कंपनियों पर अपने मंच का इस्तेमाल अतिवादियों को न करने देने के कदम उठाने का दबाव बढ़ा था। तभी ‘क्राइस्टचर्च कॉल टु एक्शन’ मुहिम शुरू हुई थी, जिसमें कई तकनीकी कंपनियां शामिल हैं।

जिन्होंने पोस्ट की और जिन्होंने देखी

फेसबुक ने कहा कि अपने शुरुआती परीक्षण में दोनों तरह के यूजर्स की पहचान की जा रही है, वे भी जिनके सामने से अतिवादी सामग्री गुजरी हो, और वे भी जिनकी सामग्रियों को फेसबुक ने कभी अतिवादी मानते हुए हटाया हो।

कंपनी ने हाल के सालों में हिंसक गतिविधियों और नफरत फैलाने वाले समूहों के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए हैं। उसका कहना है कि नियम सख्त किए गए हैं और इन नियमों का उल्लंघन करने वाली सामग्रियों और लोगों को हटाया जा रहा है। तब भी संभव है कि ऐसी सामग्री हटाए जाने से पहले कुछ लोगों तक पहुंच जाए।

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