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क्या 5जी सिग्नल के ट्रायल से मर रहे पक्षी?

पक्षियों की मौत पर उठ रहे सवाल, नीदरलैंड में भी 5जी के ट्रायल के दौरान लगे थे इस तरह के आरोप

कोरोना के लिए भी कुछ लोगों ने 5 जी को जिम्मेदार बताया था

गूंज टीम

बर्ड फ्लू को लेकर कईं स्थानों पर इसे 5 जी सिग्नल के ट्रायल से जोड़ा जा रहा है। कहा जा रहा है कि हम जिसे बर्ड फ्लू कह रहे हैं वो दरअसल 5 जी सिग्नल का ट्रायल है। अधिकारिक रूप से इस बात से इंकार किया जा रहा है और कहा गया है कि 5 जी सिग्नल से पक्षियों को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है। हालांकि इस तरह के मामले नीदरलैंड और इटली सहित कईं देशों में सामने आए थे। इन देशों में भी पक्षियों के अचानक मरने की घटनाएं सामने आई थीं।

एक साथ मरे थे 297 पक्षी

नवंबर 2018 में नीदरलैंड के हेग में 297 पक्षी अचानक मृत पाए गए थे। इसे 5 जी के ट्रायल से जोड़ा गया था। 5 नवंबर 2018 को हुई इस घटना के बाद ये स्वीकार किया गया था कि हेग के जिस पार्क में ये घटना हुई है उससे थोड़ी दूरी पर 6जी सिग्नल का ट्रायल किया गया था। कहा जाता है कि पक्षी गिरने लगे वहीं बत्तखें विचित्र व्यवहार करने लगीं थीं।

इस मामले में हेग की म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन ने कहा था कि पक्षियों के मरने की शुरुआत अक्टूबर से हो गई थी। कॉर्पोरेशन ने कहा था कि हो सकता है कि पक्षी किसी वाइरस से मरे हो या उन्हें जहर दिया गया हो। हालांकि जांच में दोनों ही बातों की पुष्टि नहीं हुई थी।

हालांकि बाद में एक यूनिवर्सिटी ने इनमें से 15 पक्षियों की ऑटोप्सी के बाद ये बताया था कि ये पक्षी आंतरिक चोट के चलते मरे थे। हालांकि यह फिर पता नहीं चला कि इतने सारे पक्षियों को एक साथ किस चीज से चोट लगी थी। हालांकि एक रिसर्च में ये भी कहा गया था कि इन पक्षियों की मौत प्राकृतिक जहर के कारण हुई थी। बताया जाता है कि नीदरलैंड में 7.4 गेगा हर्ट्ज की फ्रीक्वेंसी से 5जी का टेस्ट किया गया था।

स्विटजरलैंड ने रोका 5जी

5जी टेक्निक के पर्यावरण और जीव जंतुओं पर खराब प्रभाव पड़ने की आशंका के चलते स्विटजरलैंज ने अपना टेलीकॉम नेटवर्क को अपग्रेड कर 5जी लाने की योजना 2020 के शुरुआत में ही रोक दी थी, जबकि उस समय तक वहां इसके लिए 2000 टॉवर लग चुके थे। अब वहां पर इसके प्रभाव के बारे में अध्ययन करने के बाद इसे लागू करने के बारे में निर्णय लिया जाएगा। इस तरह इसे रोकने वाला पहला देश स्विटजरलैंड है।

कोरोना के लिए भी 5जी

इसके अलावा यूरोप में कोरोना के लिए भी 5जी को जिम्मेदार मानने वाले कम नहीं है। यूरोप में 5जी के कम से कम 50 टॉवरों में आग लगाई गई , नुकसान पहुंचाया गया और इन टेक्नोलॉजी के खिलाफ नारेबाजी भी की गई । इस तरह के 16 मामले ब्रिटेन में सामने आए तो नीदरलैंड, आयरलैंड, बेल्जियम और साइप्रस में भी इस तरह के मामले सामने आए थे। इस मामले में भी सरकारों को स्पष्टीकरण देना पड़ा कि कोरोना के पीछे ये तकनीक नहीं है।

रजनीकांत की फिल्म 2.0

मेगा स्टार रजनीकांत की 2018 की फिल्म रोबोट 2.0 में भी 5जी के पक्षियों पर प्रभाव की कल्पना की गई थी। इस फिल्म का हवाला दुनिया में 5जी की तकनीक को लेकर चल रहीं सभी चर्चाओं में दिया जाता है। इस फिल्म को लेकर देश को सेल्युलर ऑपरेटर एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने मोबाइल टॉवर्स के खिलाफ दुष्प्रचार करने का आरोप भी लगाया था। उन्होंने सीबीएफसी से इस फिल्म का प्रमाणपत्र भी रद्द करने की मांग की थी।

भारत में क्या हाल

इस मामले को लेकर भारत में भी चिंता का माहौल है। 2018 में जब नीडरलैंड में पक्षियों के मरने की जानकारी मिली थी, उसके बाद से ही इस मामले पर लगातार बहस चलती रही है। इस मामले में सोशल मीडिया में लगातार 5जी के खिसाफ पोस्ट आती रहीं हैं। हाल ही में देश में चल रही बर्ड फ्लू की समस्या को लेकर भी कहा जा रहा है कि पक्षियों की मौत बर्ड फ्लू से नहीं बल्कि 5जी के ट्रायल के चलते हुई है। इस मामले में विशेष रूप से जियो का उल्लेख किया जा रहा है।

इस मामले में कंपनी और सरकार ने कहा है कि अब तक न तो किसी ने भारत में 5जी का ट्रायल किया है और न ही इसकी अनुमति किसी को दी गई है। इसके बाद भी पक्षियों की मौत को 5जी से जोड़ने की कवायद जारी है।

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