5th December 2022

13000 साल पहले हुई थी दुनिया में पहली सांप्रदायिक लड़ाई

65 साल के अध्ययन में सामने आया सच

सांप्रदायिक लड़ाईया दुनिया में कब से शुरू हुईं इस मामले में किसी को भी ठीक से जानकारी नहीं होगी। फिलहाल एक शोध में दावा किया गया है कि दुनिया की पहली सांप्रदायिक लड़ाई 13000 साल पहले नील नदी के किनारे पर हुई थी। इस मामले में यहां मिले कंकालों की स्टडी से संकेत मिले हैं कि यह जंग कोई एक घटना नहीं थी बल्कि कई छोटी-छोटी लड़ाइयां हो रही थीं। सूडान के जेबेल सहाबा कब्रिस्तान के अवशेषों में ठीक हो चुके चोट के निशानों से संकेत मिले हैं कि इन लोगों ने कई हिंसात्मक घटनाएं झेलीं, न कि एक बार युद्ध में लड़कर मारे गए।

65 साल पहले मिले थे कंकाल

ये कंकाल आज नहीं मिले हैं। सहारा रेगिस्तान में इन कंकालों का कब्रस्तान 65 साल पहले 1956 में मिला था। इसमें 11 हजार बीसी के 61 लोग दफन थे। ऐसा सामने आया था कि इनमें से आधों की मौत घावों से हुई थी। वैज्ञानिकों को पहले लगा था कि शिकार करने वाले और मछली पकड़ने वाले इन लोगों की मौत किसी युद्ध में हुई थी और इसे दुनिया की पहली सांप्रदायिक हिंसा माना गया था। नई माइक्रोस्कोपी तकनीकों की मदद से इनकी हड्डियों को फिर से स्टडी करने पर पता चला है कि ये कई हिंसात्मक घटनाओं में घायल हुए। हो सकता है कि इसके पीछे जलवायु परिवर्तन एक कारण रहा हो।

फ्रेंच रिसर्चर को मिले 106 घाव

फिलहाल ये कंकाल लंदन के ब्रिटिश म्यूजिय में रखे हैं। इन्हें फ्रेंच नैशनल सेंटर फॉर साइंटिफिक रिसर्च और यूनिवर्सिटी ऑफ टूलूज के वैज्ञानिकों ने इनका अध्ययन किया है। इसमें पहले नहीं देखे गए 106 ऐसे निशान मिले जिससे हथियारों से लगीं चोटों, एकल युद्ध और प्राकृतिक कारणों से मौत की अलग-अलग पहचान मिली। रिसर्चर्स को 41 ऐसे लोग मिले हैं जिनके सर पर मौत के वक्त कम से कम एक भरा हुआ या भर रहा घाव मिला है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि नील घाटी में समुदायों के बीच हुईं घटनाओं की संख्या से भर चुके घावों की संख्या मिलती-जुलती है। ये घटनाएं लेट प्लीस्टोसीन काल में 1.26 लाख से 11,700 साल पहले की हैं। रिसर्च में कहा गया है कि ये झगड़े अलग-अलग समुदायों के बीच हुए होंगे। साइंटिफिक रिपोर्ट्स में छपे रिसर्च पेपर में कहा गया है कि इन झगड़ों के पीछे प्रभुत्व की लड़ाई और जलवायु परिवर्तन के कारण पैदा हुई स्थिति हो सकती है।

झगड़े के मामले में अनुमान

इनके बीच किस बात को लेकर लड़ाई हुई इस बारे में ठीक-ठीक जानकारी नहीं है। यह माना जा रहा है कि हिमयुग में पर्यावरण से जुड़ी आपदाओं के कारण ये लोग एक पास रहने के लिए मजबूर हुए होंगे। इस दौरान यूरोप और उत्तरी अमेरिका के हिमखंडों ने मिस्र और सूडान का तापमान ऐसा कर दिया था कि लोग नील नदी के पास रहने को मजबूर थे लेकिन नदी से उन्हें ज्यादा मदद नहीं मिलती थी। वे थोड़ी से जमीन पर सुरक्षा तलाश रहे थे और संसाधन भी कम थे। खाने की कमी के कारण मछली पकड़ने को लेकर इन समूहों में झगड़े हुए होंगे।

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