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MPPSC कर रहा वकीलों के करियर से खिलवाड़

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर टिका है एडीपीओ परीक्षा का भविष्य लेकिन आयोग अभी से परीक्षा कराने को उतारू

इंदौर

देश और प्रदेश में बेरोजगारी को लेकर युवाओं में आक्रोष है लेकिन मध्य प्रदेश का लोक सेवा आयोग (MPPSC) इस बात से बेखबर है और वो लगातार आयोग की परीक्षा में सम्मिलित होने वाले अभ्यर्थियों के साथ खिलवाड़ कर रहा है। इस बार आयोग की लापरवाही के शिकार हुए एडीपीओ की परीक्षा देने की तैयारी में लगे विधि के छात्र। सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी यानी एडीपीओ का नोटिफिकेशन तीन साल पहले जारी किया गया था लेकिन अब तक इसकी परीक्षा नहीं हुई है।

कुछ समय पहले आयोग ने परीक्षा के सिलेबस में बड़ा बदलाव किया जिसे लेकर कुछ अभ्यर्थी न्यायालय की शरण में गए हैं। लेकिन आयोग ने 18 दिसंबर को परीक्षा कराने की तैयारी कर ली है। जबकि जबलपुर उच्च न्यायालय ने इस मामले में निर्देश दिया है कि इस पर भी सुप्रीम कोर्ट लंबित एक समान याचिका पर दिया गया निर्णय लागू होगा।सवाल यह है कि यदि कोर्ट ने सिलेबस में बदलाव को खारिज दिया तो इस परीक्षा के माध्यम से नियुक्ति पाने वाले अभ्यर्थियों का क्या होगा।

आयोग पहले से ही उलझा हुआ है आयोग

ऐसा नहीं है कि आयोग के सामने इस तरह की परिस्थिति पहली बार बनी है। इसके पहले भी आयोग इसी तरह की गलती एमपीपीएससी की 2019 की परीक्षा में कर चुका है। इस मामले में भी कोर्ट में याचिका लगाई गई थी लेकिन आयोग ने निर्देश की प्रतीक्षा किए बिना ही मुख्य परीक्षा करा ली थी। इसके बाद इस याचिका का निराकरण करते हुए कोर्ट ने मुख्य परीक्षा रद्द कर दी है। इसके बाद भी आयोग एडीपीओ की परीक्षा को कराने पर उतारू है। जबकि इस मामले में भी आयोग को आगे मुश्किल हो सकती है।

नए सिलेबस को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट में दो याचिकाएं लगाई गई जिसमें एक याचिका में हाई कोर्ट जज मनिंदर सिंह भट्टी ने फैसला दिया है कि इस तरह की मंजूश्री वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट की लार्जर बेंच में पेंडिंग है। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग नए सिलेबस को लेकर यदि परीक्षा आयोजित करता है तो जैसा फैसला सिलेबस में बदलाव को लेकर लगी याचिका में आएगा वैसा ही आगे होगा।

इस बात का अर्थ यह है कि यदि फैसला पेटीशनर के पक्ष में आया तो सभी नियुक्तियां रद्द हो जाएंगी और सभी लोग के अभ्यर्थियों को यही डर सता रहा है कि यदि पेटीशनर के पक्ष में फैसला आएगा तो सभी लोगों का जीवन बर्बाद हो जाएगा।

 हो रही है परीक्षा बढ़ाने की मांग

विधि के अभ्यर्थी परीक्षा को आगे बढ़ाने की मांग कर रहे हैं साथ ही यह भी मांग है कि पुराने सिलेबस से परीक्षा ली जाएगी तो भविष्य में कोई दिक्कत नहीं आएगी लेकिन मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग सरकार की छवि खराब करने पर तुला है और जैसा 2019 की एमपीपीएससी की मुख्य परीक्षा का रिजल्ट आने के बाद हाईकोर्ट ने पुनः प्रारंभिक परीक्षा का रिजल्ट घोषित करने और मुख्य परीक्षा पुन्हा लेने के आदेश दिए वैसा ही सहायक लोक अभियोजन अधिकारी की परीक्षा में भी होगा और लोगों का जीवन बर्बाद हो जाएगा। इससे अच्छा है परीक्षा 3 महीने बाद ली जाए और पुराने सिलेबस से ही ले ली जाए लेकिन मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग जिद कर रहा है।

उम्र बढ़ाने को लेकर भी है विवाद

 एज रिलैक्सेशन के लिए ग्वालियर हाई कोर्ट सिलेबस को लेकर इंदौर में एक और दो याचिकाएं जबलपुर में लगी है एक याचिका में 12 तारीख  लगी है । वही 5 दिसंबर की तारीख इंदौर हाई कोर्ट व 6 दिसंबर की तारीख ग्वालियर हाईकोर्ट में भी लगी है।

ये है आयोग की दास्तान-ए-एडीपीओ

  • जून 2021 को नोटिफिकेशन आया जिसमे 92 पोस्ट थी
  • 29 एक्ट और जर्नल नॉलेज के 150 प्रश्न आना थे ।
  • दिसंबर 2021 में एग्जाम होना था।
  • फिर एक एक्ट कम कर दिया 28 बचे।
  • नवंबर 2021 में फिर पोस्ट बढ़ा दी 184 हो गयी।। साथ में परीक्षा की तारीख भी आगे बढ़ा दी और जून 2022 कर दी।
  • परीक्षा को पहले ऑनलाइन करवाना था लेकिन बाद में ऑफलाइन भी किया गया है लगभग 30000 अभ्यर्थी इस परीक्षा को देंगे।
  • इसके बाद एक बार फिर परीक्षा आगे बढ़ी और 16 अक्टूबर 2020 को एग्जाम डेट फिक्स की गई। लेकिन फिर परीक्षा डेट आगे बढ़ाई और 18 दिसंबर 2022 कर दी गई
  • इसके बाद 30 अक्टूबर 2022 को नया सिलेबस घोषित किया गया जिसमें 6 एक्ट हटा दिए और 10 नए एक्ट जोड़ दिए।
  • वर्तमान में कुल 256 पदों के लिए परीक्षा हो रही है।
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