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आयोग की लापरवाही, बेरोजगारों पर भारी

एमपीपीएमसी को फिर से लेना पड़ रही है 2019 की मेन्स, फिर मांग रहे अभ्यर्थियों से फीस

गूंज रिपोर्टर

कोर्ट द्वारा 2019 की मुख्य परीक्षा को रद्द किए जाने के बाद एमपीपीएसी एक बार फिर 2019 की मुख्य परीक्षा का आयोजन कर रहा है। हालांकि इस परीक्षा को मामला कोर्ट मे लंबित रहते हुए आयोजित करने की जिद भी उसी की थी लेकिन इसका नुकसान अभ्यर्थी झेल रहे हैं। आयोग ने फिर से अभ्यर्थियों से फीस की मांग की है। लगभग 10,000 अभ्यर्थी परीक्षा देंगे इस हिसाब से लगभग डेढ़ करोड़ रुपए आयोग के पास जमा होंगे इसका साफ मतलब है कि आयोग कमाई कर रहा है उसे अभ्यर्थियों से कोई लेना देना नहीं है। इतना ही नहीं आयोग इस गलती से कोई सबक भी नहीं ले रहा है। एडीपीओ की परीक्षा को लेकर कईं मामले विभिनन कोर्ट मे लंबित हैं लेकिन आयोग इस परीक्षा को लेकर भी अड़ा हुआ है।

ओबीसी के खेल में ही आयोग ने ओबीसी को उलझाया

हाईकोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ाने वाला लोक सेवा आयोग मनमानी पर उतारू है। हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग ने 2019 की प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित किया हुआ। मुख्य परीक्षा का आयोजन किया गया। इस परीक्षा में लगभग 10800 अभ्यर्थी सम्मिलित हुए थे। इस मामले में हाईकोर्ट ने पहले ही कहा था कि जो भी रिजल्ट होगा वहां हाई कोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय के अधीन ही रहेगा फिर भी मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग नहीं माना और मुख्य परीक्षा 2019 का परिणाम घोषित कर दिया। दो महीने बाद साक्षात्कार की दिनांक भी घोषित कर दी लेकिन फिर हाईकोर्ट ने कहा कि 2019 की प्रारंभिक परीक्षा का रिजल्ट दोबारा बनाया जाए और मुख्य परीक्षा का आयोजन उसी रिजल्ट से लिया जाए।

इसका मतलब साफ है कि जो भी अभ्यर्थी साक्षात्कार के लिए चयनित हुए थे, उन्हें दोबारा मुख्य परीक्षा देना होगी। अब आयोग ने ओबीसी के 27% आरक्षण के मामले में एक नया फार्मूला बनाया जिसमें 13% जनरल और 13% ओबीसी की लिस्ट बनाई गई साथ ही एक लिस्ट में 87% अभ्यर्थियों को शामिल किया गया । यह सभी लोग अब दोबारा मुख्य परीक्षा 2019 को देंगे और इन अभ्यर्थियों से मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग एक बार फिर मुख्य परीक्षा की फीस ले रहा है जो निश्चित रूप से पूरी तरह गलत है क्योंकि मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की मनमानी में अभ्यर्थियों को राशि देना पड़ रही है यह राशि लगभग डेढ़ करोड रुपए से अधिक होगी।

ऐसी ही स्थिति बन रही एडीपीओ की परीक्षा मे

यदि सुबह का भूला शाम को घर आ जाए तो उसे भूला नहीं कहते लेकिन आयोग इस पैमाने मे भी फिट नहीं बैठ रहा है। एडीपीओ की परीक्षा को लेकर आयोग वही गलती दोहरा रहा है जिसे उसने एमपीपीएससी 2019 में की थी। कुल मिलाकर इससे ऐसा लग रहा है कि आयोग की मंशा नियुक्ति देने की बजाय बेराोजगारों को परीक्षाओं में उलझाए रखने की है ताकि वे सड़कों पर न उतर आएं। इस मामले में एडीपीओ की अभ्यर्थी मुख्यमंत्री से भी गुहार लगा चुके हैं लेकिन कोई हल नहीं निकला है।

70 लाख हुए थे खर्च पिछली मुख्य परीक्षा पर

आरटीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछली बार आयोग ने 2019 की मुख्य परीक्षा का आयोजन किया था। जिसमें आयोग ने बताया कि उसके 70 लाख रुपए से अधिक खर्च हुए हैं। अब एक बार फिर आयोग अपनी गलती की सजा अभ्यर्थियों को दे रहा है और उनसे मुख्य परीक्षा देने के लिए फीस ली जा रह

राज्य सरकार को ठेंगा दिखा रहा आयोग

मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग मध्य प्रदेश सरकार को ठेंगा दिखा रहा है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कोरोना काल में वेकेंसियां नहीं आई थीं। इस कारण से 31 दिसंबर 2023 तक सभी आयु सीमा पार करने वाले अभ्यर्थियों को मौका देने की बात कही थी। लेकिन मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग एक भी अभ्यर्थियों को मौका नहीं दे रहा है। इस बात को लेकर ग्वालियर हाईकोर्ट में भी पिटीशन लगी है। साथ ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को भी आयोग की मनमानी के विषय की जानकारी दी गई है। मुख्यमंत्री ने इंदौर एयरपोर्ट पर जल्द ही इस विषय में कार्रवाई करने की बात भी कही थी।

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