एक दूसरे को दोष दे रहे केंद्र और राज्य

नई दिल्ली

ऑक्सीजन की कमी के चलते आमजन अब भी जान गंवा रहे हैं और जिम्मेदार उसी तरह से अपनी जिम्मेदारी दूसरों पर डाल रहे हैं। पीड़ित आमजनों के साथ बेशर्मी दिखाते कुछ सिरफिरे अब भी इसके लिए उन्हें ही जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

ऑक्सीजन के मामले को लेकर कहा जा रहा है कि केन्द्र सरकार ने पीएम केयर्स फंड से 162 ऑक्सीजन प्लांट्स के लिए 20 करोड़ रुपए जारी किए थे। ये राशि इस साल जनवरी में जारी की गई थी।

इस मामले में जिम्मेदार लोग भी राज्य सरकारों को पर ठीकरा फोड़ रहे हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा राशि जारी कर दिए जाने के बाद भी राज्य सरकारें सोती रही हैं। इस तरह की बातें सोशल मीडिया पर चलाई जा रही हैं और यहां तक कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग भी ऐसा कर रहे हैं। देखिए असम के स्वास्थ्य मंत्री हिमंत विस्व सर्मा का ट्वीट

असम के स्वास्थ्य मंंत्री जो बता रहे हैं वो उसके बिलकुल उलट है। इसके लिए पांच जनवरी 2021 का पीआईबी द्वारा जारी प्रेस नोट देखना चाहिए। आप इस प्रेस नोट को आप यहां क्लिक करके भी पढ़ सकते हैं। इसमें स्पष्ट रूप से लिखा है कि इन ऑक्सीजन प्लांट्स को लगाने की प्रक्रिया स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन आने वाला स्वायत्त निकाय सेंट्रल मेडिकल सप्लाई सर्विस (सीएमएसएस) करेगा। इस प्रेस नोट में यह भी बताया गया है कि जो 201.58 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं उनमें से 137.33 करोड़ रुपए प्लांट के लिए और शेष 64.25 करोड़ रुपए इसके वार्षिक रखरखाव के लिए थे।

टेंडर भी हुआ था जारी

यदि आपको इससे भी मामला स्पष्ट नहीं हो रहा है तो आप इन ऑक्सीजन प्लांट्स (टेंडर 150 के लिए ही जारी किया गया था) लिए सीएमएसएस द्वारा जारी टेंडर भी देख सकते हैं। यह टेंडर 20 अक्टूबर 2020 को जारी किया गया था और इसमें जारी निविदाएं 11 नवंबर को खोली जानी थी। इस टेंडर में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि टेंडर को सीएमएसएस ने कॉल किया है।

इसमें कहा गया था कि टेंडर स्वीकृति का पत्र प्राप्त होने के 45 दिन के भीतर सामग्री यानी ऑक्सीजन प्लांट सप्लाए करने होंगे। टेंडर को भाषा को देखें को तो टेंडर 11 नवंबर को खोला जाना था और उसी दिन यह तय हो गया होगा कि टेंडर किसे दिए या जा रहा है। ऐसे में टेंडर की स्वीकृति का पत्र भी कम से कम पीएम मोदी द्वारा इसके लिए जनवरी में फंड जारी किए जाने के बाद हो गया होगा। तो फिर क्या प्लांट सप्लाय करने की 45 दिन की समय सीमा अप्रैल तक समाप्त नहीं हुई?

साधारण आदमी तो छोड़िए कंगना रनाउत जैसी सेलिब्रिटी भी इस राजनीतिक मुद्दे में गलत जानकारी ट्वीट कर रही हैं। देखिए उनका ट्वीट

ऐसे में स्वयं तय कर सकते हैं कि 162 PSA ऑक्सीजन प्लांट के मामले में किस की क्या भूमिका है। केन्द्र सरकार द्वारा ऑक्सीजन प्लांट्स के लिए राज्य सरकारो को फंड आवंटन की बात सही नहीं है। इस मामले में सारे सूत्र केन्द्र के पास ही थे। स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक ट्वीट के जरिए बताया है कि 33 PSA ऑक्सीजन प्लांट्स लगाए जा चुके हैं।

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