8th December 2022

कन्नूर विश्वविद्यालय के पीजी पाठ्यक्रम में सावरकर, गोलवलकर का काम शामिल करने पर विवाद

कांग्रेस और मुस्लिम संगठन विरोध में लेकिन वामपंथी छात्र संगठन समर्थन में

कोझीकोड

यह विवाद एमए के शासन एवं राजनीति के पाठ्यक्रम को लेकर है, जिसमें सावरकर के ‘हिंदुत्व: हिंदू कौन है?’ (Hindutva: who is a Hindu) और गोलवलकर के ‘बंच ऑफ थॉट्स’ (Bunch of Thoughts) एवं ‘वी ऑर अवर नेशनहुड डिफाइंड’ (We or Our Nationhood Defined) के हिस्सों को शामिल किया गया है। इस पाठ्यक्रम में दीनदयाल उपाध्याय के ‘एकात्म मानववाद’ (Integral Humanism) और बलराज मधोक की ‘इंडियानाइजेशन: ह्वाट, ह्वाई एंड हाउ’ (Indianisation: What, Why and How) को भी शामिल किया गया है। खास बात ये है कि इस मामले में कांग्रेस और मुस्लिम छात्र संगठन इसका विरोध कर रहे हैं लेकिन वामपंथी छात्र संगठन विरोध में शामिल नहीं हैं।

केरल की कन्नूर यूनिवर्सिटी में पाठ्यक्रम में बदलाव को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। केरल स्टूडेंट्स यूनियन का आरोप है कि पाठ्यक्रम में हिंदुत्व के विचारकों के लेखन शामिल किए गए हैं। छात्र संगठनों ने आरोप लगाया कि सीपीआईएम नियंत्रित यूनिवर्सिटी में संघ परिवार का अजेंडा शामिल किया जा रहा है। छात्र संगठनों ने यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन भी किया।

बीते गुरुवार को कांग्रेस की छात्र शाखा केरल स्टूडेंट यूनियन ने विश्वविद्यालय में एक मोर्चा निकाला और पाठ्यक्रम की प्रतियां जलाईं। उन्होंने माकपा के नियंत्रण वाले विश्वविद्यालय पर संघ परिवार के एजेंडे का लागू करने का आरोप लगाया। विपक्षी छात्र संगठनों केरल स्टूडेंट्स यूनियन (केएसयू) और मुस्लिम स्टूडेंट्स फेडरेशन (एमएसएफ) ने गुरुवार को पाठ्यक्रम से किताबों को हटाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा को भगवाकरण करने का प्रयास किया जा रहा है।

वीसी ने भगवाकरण के आरोपों को गलत बताया

दूसरी ओर कन्नूर विश्वविद्यालय के कुलपति गोपीनाथ रविंद्रन ने भगवाकरण के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा, ‘हमने गांधीजी, नेहरू, आंबेडकर और टैगोर के कार्यों को शामिल किया है और पाठ्यक्रम में सावरकर और गोलवलकर के कार्यों को शामिल किया गया है। छात्रों को सभी विचारधाराओं के पीछे मूल पाठ को सीखने और समझने दें। उन्होंने (सावरकर और गोलवलकर) ने जो कहा, वह वर्तमान भारतीय राजनीति का हिस्सा है। इसे सीखने में गलत क्या है? ’

बीते दिनों केरल के केंद्रीय विश्वविद्यालय ने फैकल्‍टी के सदस्यों से ऐसे किसी भी प्रकार के भड़काऊ बयान देने से परहेज करने को कहा है, जो राष्ट्रविरोधी हों या राष्ट्रहित के खिलाफ हों। इस संबंध में बीते दो सितंबर को सर्कुलर जारी किया गया था, जिसमें कहा गया कि भड़काऊ बयान देने वाले स्टाफ और फैकल्टी सदस्यों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

वामपंथी विरोध में नहीं

राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री आर. बिंदू ने शुक्रवार को मीडिया से कहा कि यह एक संवेदनशील मुद्दा है और हमने कुलपति (रवींद्रन) से आधिकारिक बयान मांगा है। बिंदू ने कहा कि तो चलिए उनके जवाब का इंतजार करते हैं और फिर तय करेंगे कि क्या करने की जरूरत है।

वहीं कन्नूर विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष एसएफआई से ताल्लुक रखने वाले एम.के. हसन ने कहा कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में भी आरएसएस के इन विचारकों की किताबें पढ़ाई जा रही हैं।हसन ने कहा कि चीजें बहुत स्पष्ट हैं, चाहे वह बाइबिल हो या कोई अन्य साहित्य, केवल अगर कोई पढ़ता और समझता है कि यह क्या है, तो कोई कुछ सीख सकता है और फिर राय बना सकता है। हम इस पहलू पर एक विचार-विमर्श का आयोजन कर रहे हैं और हम सभी को आने और अपनी बात साझा करने के लिए आमंत्रित करते हैं।

इन पुस्तकों को किया गया है शामिल

पाठ्यक्रम को पिछले महीने एक विशेषज्ञ समिति के सुझावों के आधार पर संशोधित किया गया था। इसे कोर पेपर ‘कंटेम्परेरी पॉलिटिकल थियरी’ को ‘थीम्स इन इंडियन पॉलिटिक्स’ से बदल दिया था। ये पुस्तकें एमए गवर्नेंस एंड पॉलिटिक्स कोर्स के तीसरे सेमेस्टर कोर कोर्स ‘थीम्स इन इंडियन पॉलिटिक्स’ के सिलेबस में शामिल की गई हैं। फिलहाल यह सिर्फ यूनिवर्सिटी से संबद्ध ब्रेनन कॉलेज, थालास्सेरी में ही पढ़ाई जा रही हैं। पिछले साल नवंबर की शुरुआत में यूनिवर्सिटी ने नए पाठ्यक्रमों को स्वीकृत किया था, यह उनमें से एक हैं।

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